बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को हुए चर्चित कथित एनकाउंटर मामले में आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया है। घटना के करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस ने बिहार एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) के जवान अक्षय कुमार को तकनीकी सर्विलांस के आधार पर गिरफ्तार कर लिया है। भोजपुर एसपी राज ने इसकी पुष्टि की है। अक्षय कुमार पर आरोप है कि उसने आत्मसमर्पण कर चुके भरत तिवारी (भरत भूषण तिवारी) पर पहली गोली चलाई थी। इस कार्रवाई के दौरान भरत को गोली लगी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
फेसबुक लाइव वीडियो से सामने आई सच्चाई
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ एक सोशल मीडिया लाइव वीडियो के सामने आने के बाद आया। वीडियो में साफ दिख रहा था कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने अपनी पिस्टल फेंक दी थी और हाथ उठाकर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद, परिजनों के अनुसार निहत्था होने के बाद उसे 5 गोलियां मारी गईं। शुरुआती दौर में पुलिस इसे मुठभेड़ बता रही थी, लेकिन इस वीडियो और परिवार के विरोध के कारण मामला गंभीर जांच का विषय बन गया।
हाल ही में पीड़ित परिवार ने पटना जाकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई थी, जिसके बाद जांच में तेजी आई। पुलिस ने आरोपी जवान की सरकारी सर्विस पिस्टल को पहले ही बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच के लिए पटना भेज दिया था।
अन्य पुलिस अधिकारियों पर भी लटकी तलवार
भरत तिवारी की मां आशा देवी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में सिर्फ एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ही नहीं, बल्कि तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश शर्मा और शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत कई पुलिसकर्मी नामजद हैं। इस घटना के बाद सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार के नेतृत्व में न्यायिक आयोग का गठन किया है। साथ ही, तत्कालीन एसडीपीओ को पुलिस मुख्यालय क्लोज और एसडीएम को सचिवालय अटैच कर दिया गया था। एसटीएफ जवान की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सरेंडर के बाद किसके आदेश पर गोलियां चलाई गईं, जिससे अन्य पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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