अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हाल ही में उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो ने प्रदेश की राजनीति और जनमानस में एक नई बहस छेड़ दी है। इन सवालों के बीच शनिवार 3 जनवरी को पौड़ी के तत्कालीन एएसपी और एसआईटी के महत्वपूर्ण सदस्य रहे शेखर सुयाल ने मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। वर्तमान में हरिद्वार के एसपी ग्रामीण के पद पर तैनात सुयाल ने जोर देकर कहा कि एसआईटी की जांच पूरी तरह वैज्ञानिक और साक्ष्यों पर आधारित थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी जांच के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को न केवल दोषी माना बल्कि उन्हें आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई। सुयाल के अनुसार यदि जांच में कोई कमी होती तो उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय इसे पहले ही खारिज कर चुके होते। उन्होंने जनता से अपील की कि किसी भी भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट पर विश्वास करने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है।
वीआईपी के नाम का रहस्योद्घाटन
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल हमेशा से उस वीआईपी को लेकर रहा है जिसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। शेखर सुयाल ने इस रहस्य से पर्दा उठाते हुए बताया कि जांच के दौरान आरोपियों की आपसी चैट में वीआईपी शब्द का जिक्र आया था। जब एसआईटी ने इस सूत्र को पकड़ा तो अंकिता के दोस्त पुष्पदीप ने भी पुष्टि की कि 16 सितंबर को रिजॉर्ट में एक व्यक्ति सुरक्षाकर्मियों के साथ आया था। पुलिस ने जब रिजॉर्ट के स्टाफ और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया तो कड़ी नोएडा के रहने वाले धर्मेंद्र उर्फ प्रधान तक जा पहुंची। सुयाल ने बताया कि धर्मेंद्र एक जमीन के सिलसिले में उस क्षेत्र में आए थे और भोजन के लिए रिजॉर्ट में रुके थे। एसआईटी ने उनके बयानों और उस दिन की उनकी मौजूदगी के कारणों की गहनता से पुष्टि की थी। सोशल मीडिया पर चल रहे अन्य बड़े नामों को उन्होंने पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक बताया।
घटनाक्रम और आरोपियों की साजिश
सुयाल ने 18 सितंबर 2022 की उस काली रात का विवरण देते हुए बताया कि आरोपियों ने अंकिता की हत्या को एक दुर्घटना या लापता होने की घटना के रूप में पेश करने की पूरी कोशिश की थी। आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत राजस्व पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने अंकिता के उन दोस्तों का फायदा उठाना चाहा जो घटना से 2 दिन पहले रिजॉर्ट आए थे ताकि यह दिखाया जा सके कि अंकिता उनके साथ कहीं चली गई है। हालांकि अंकिता की पुष्पदीप के साथ हुई आखिरी चैटिंग ने पुलिस को सही दिशा दी। इस चैटिंग में अंकिता ने स्पष्ट रूप से एक्स्ट्रा सर्विस के दबाव और अपनी असुरक्षा की बात कही थी। 18 सितंबर की रात 9 बजे जब अंकिता का फोन बंद हुआ वही समय उसकी हत्या का निकला। आरोपियों ने शुरू में पुलिस को गुमराह किया लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के सामने वे टूट गए।
सबूतों के नष्ट होने के दावों का खंडन
सोशल मीडिया पर अक्सर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि रिजॉर्ट में बुलडोजर चलने से सबूत मिटा दिए गए। इस पर शेखर सुयाल ने स्पष्ट किया कि 22 सितंबर को केस पुलिस को मिलने के तुरंत बाद कमरे को सील कर दिया गया था। 23 सितंबर की सुबह फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की टीम ने मौके पर पहुंचकर वीडियोग्राफी की और हर सूक्ष्म साक्ष्य को एकत्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट में पेश की गई वीडियोग्राफी और साक्ष्य इस बात का प्रमाण हैं कि कमरे के भीतर के सबूत सुरक्षित थे। पुलकित आर्य और उसके साथियों के जुर्म को साबित करने में ये वैज्ञानिक साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण साबित हुए। सुयाल ने कहा कि जांच को गुमराह करने वाले दावों में कोई तथ्य नहीं है क्योंकि अदालत ने भी एसआईटी की कार्यप्रणाली पर अटूट भरोसा जताया है। एफएसएल की रिपोर्ट ने भी कमरे के भीतर किसी भी छेड़छाड़ की संभावना से साफ इनकार किया था।
पुष्पदीप की भूमिका और पुलिस कार्रवाई
अंकिता के मित्र पुष्पदीप ने इस पूरे मामले में पुलिस का बहुत सहयोग किया था। सुयाल ने बताया कि पुष्पदीप ने ही पुलिस को अंकिता के मोबाइल संदेशों और उसकी अंतिम बातचीत के बारे में महत्वपूर्ण सुराग दिए थे। जब आरोपियों ने यह दावा किया कि अंकिता 19 सितंबर की सुबह गायब हुई थी, तब पुष्पदीप के साक्ष्यों ने ही इस झूठ की पोल खोली। 22 सितंबर को जब मामला राजस्व पुलिस से रेगुलर पुलिस को ट्रांसफर हुआ, तब सुयाल ने स्वयं कमान संभाली थी। उन्होंने बताया कि पुलिस टीम ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए तीनों आरोपियों पुलकित, अंकित और सौरभ को धर दबोचा। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सटीक पूछताछ के कारण ही आरोपी अंकिता के शव की लोकेशन बताने पर मजबूर हुए। इसके बाद ही अंकिता का पार्थिव शरीर चीला शक्ति नहर से बरामद किया जा सका था।
न्यायिक प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति
लेख के अंत में सुयाल ने दोहराया कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए एसआईटी ने दिन-रात एक किया था। आरोपियों द्वारा रचे गए हर भ्रमजाल को तोड़ते हुए पुलिस ने उनके इकबालिया बयान और मौके से मिले साक्ष्यों का मिलान किया। अंकिता के परिजनों और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच की गई थी। सुयाल का मानना है कि दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा इस बात का प्रमाण है कि जांच सही दिशा में थी। उन्होंने जनता से अपील की कि वे भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखें क्योंकि कानून तथ्यों और सबूतों के आधार पर काम करता है जो इस मामले में आरोपियों के खिलाफ पूरी तरह स्पष्ट थे। आज भी तीनों दोषी जेल में अपनी सजा काट रहे हैं और एसआईटी की जांच को देश की सर्वोच्च अदालतों ने भी न्यायसंगत माना है।
---समाप्त---