उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर से नया मोड़ आ गया है जिसने राज्य की सियासत और पुलिस प्रशासन में खलबली मचा दी है। पिछले पच्चीस वर्षों से अभिनय जगत में सक्रिय अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को एक शिकायती पत्र भेजकर बेहद गंभीर दावे किए हैं। उर्मिला का कहना है कि उनके पास ऐसी रिकॉर्डिंग्स मौजूद हैं जो इस हत्याकांड के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब कर सकती हैं। यह मामला केवल एक साधारण शिकायत नहीं है बल्कि इसमें सत्ता पक्ष के कद्दावर नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों के नाम सीधे तौर पर घसीटे गए हैं जिससे पूरे प्रदेश में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अभिनेत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब से उन्होंने सच बोलने की कोशिश की है तभी से उन्हें अपनी जान जाने का डर सता रहा है।
वीआईपी चेहरों का जिक्र और रिकॉर्डिंग का सनसनीखेज दावा
उर्मिला सनावर ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उनके पति सुरेश राठौर के माध्यम से कुछ ऐसी रिकॉर्डिंग्स सामने आई हैं जिनमें अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ियों का खुलासा हुआ है। अभिनेत्री का दावा है कि इन रिकॉर्डिंग्स में पूर्व विधायक सुरेश राठौर के साथ-साथ दुष्यंत कुमार गौतम और अन्य प्रभावशाली वीआईपी व्यक्तियों के नामों का जिक्र है। उन्होंने बताया कि इस जानकारी को उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम को भी साझा किया था लेकिन न्याय मिलने के बजाय अब उन्हें ही प्रताड़ित किया जा रहा है। पत्र में इस बात का भी संकेत दिया गया है कि रसूखदारों को बचाने के लिए शायद तथ्यों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और यही कारण है कि अब इस मामले की गूंज देहरादून से लेकर दिल्ली तक सुनाई देने लगी है।
पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल और सुरक्षा की गुहार
अभिनेत्री ने अपनी शिकायत में उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की एसआईटी (SIT) बिना किसी ठोस आधार के उन्हें परेशान कर रही है। उर्मिला का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं फिर भी पुलिस भारी संख्या में बल लेकर उन्हें इस तरह गिरफ्तार करने पहुंची जैसे वह कोई बड़ी अपराधी हों। इस व्यवहार से आहत होकर उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपने लिए सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने पत्र में यह भी साफ कर दिया है कि यदि उन्हें या उनके जीवन को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचती है तो इसके लिए उत्तराखंड पुलिस के साथ-साथ पूर्व विधायक सुरेश राठौर, दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जिम्मेदार होंगे।
न्याय की मांग और सिस्टम की साख पर लगा दांव
यह पूरा प्रकरण अब केवल एक हत्याकांड की जांच तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह देवभूमि की कानून व्यवस्था और पारदर्शिता की परीक्षा बन गया है। उर्मिला सनावर ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि अपराधियों को सजा मिल सके और बेगुनाहों को न्याय मिले। एक कलाकार द्वारा इस तरह सामने आकर शक्तिशाली लोगों के विरुद्ध आवाज उठाना यह दर्शाता है कि अंकिता भंडारी केस की आग अभी ठंडी नहीं हुई है। अब जनता की नजरें पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करेंगे या फिर रसूख के आगे सच एक बार फिर दफन हो जाएगा। इस पत्र ने निश्चित रूप से राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
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