बीकानेर। ​प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बीकानेर के अलफुर्कान एजुकेशनल ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद सदीक उर्फ सादिक खान को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED ने आरोप लगाया है कि यह मामला सिर्फ पैसों की हेराफेरी का नहीं है, बल्कि इसके तार संदिग्ध गतिविधियों और अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों से जुड़े हो सकते हैं।

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मुख्य आरोप और ED के दावे

बिना हिसाब का कैश: ED का मुख्य आरोप है कि सादिक खान ने ट्रस्ट और मस्जिद के संचालन के नाम पर आम लोगों से भारी मात्रा में नकद चंदा इकट्ठा किया। एजेंसी का दावा है कि इस पैसे का कोई आधिकारिक हिसाब-किताब, रसीद या बहीखाता तैयार नहीं किया गया। ​व्यक्तिगत उपयोग और संदिग्ध खर्च: आरोप है कि सादिक इस कैश को व्यक्तिगत कब्जे में रखता था और इसे अपनी निजी तथा संदिग्ध गतिविधियों पर खर्च करता था। ​अवैध विदेशी यात्राएं: ED ने यह भी आरोप लगाया है कि ट्रस्ट के पैसों का उपयोग कई विदेशी यात्राओं (बांग्लादेश, नेपाल, कतर, ओमान) के लिए किया गया, जिनका कोई वैध व्यावसायिक या व्यक्तिगत आधार नहीं था। संदिग्ध संपर्क: जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश यात्रा के दौरान सादिक की मुलाकात मोहम्मद सलीम उर्फ सौरभ वैद्य से हुई थी, जिसे बाद में प्रतिबंधित संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ED का मानना है कि यह संपर्क वैचारिक और आपराधिक गठजोड़ की गंभीरता को साबित करता है।

कानूनी स्थिति

​यह महत्वपूर्ण है कि ये सभी ED द्वारा लगाए गए आरोप हैं जो जांच के दौरान सामने आए हैं। सादिक खान को स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया है और वह वर्तमान में ED की कस्टडी में हैं। कोर्ट में आरोपों को सिद्ध करना अभी बाकी है। कानूनी रूप से, किसी भी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि उस पर लगे आरोप उचित संदेह से परे सिद्ध नहीं हो जाते। जांच एजेंसी अब इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए सबूत जुटा रही है।


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