राजधानी दिल्ली के प्रमुख धरना स्थल जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार शारीरिक थकान और अस्वस्थता का सामना कर रहे अभिजीत दीपक ने खुद इस बात की जानकारी अपने समर्थकों और देशवासियों के साथ साझा की है। उन्होंने बताया कि वह पिछले कई दिनों से तेज बुखार और पूरे शरीर में भयंकर दर्द से जूझ रहे हैं। इस कठिन परिस्थिति में भी वह लगातार काम कर रहे थे और केवल दर्द निवारक दवाइयों के सहारे अपनी दिनचर्या और विरोध प्रदर्शन को आगे बढ़ा रहे थे। हालांकि शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ने के कारण अब उन्हें मजबूरी में कुछ घंटों का विश्राम लेना पड़ रहा है।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक और सीधा संदेश पोस्ट करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें तेज बुखार है और पूरे शरीर में काफी दर्द महसूस हो रहा है। वह केवल पेनकिलर्स के दम पर ही अब तक टिके हुए थे। उन्होंने जंतर-मंतर पर एकत्र हुए समर्थकों और आम जनता से अपनी अनुपस्थिति के लिए विनम्रतापूर्वक माफी मांगी। उनका कहना था कि अगर लोग उन्हें आज जंतर-मंतर पर न देखें तो इसके लिए वह हाथ जोड़कर क्षमा मांगते हैं। उन्हें इस समय अपने शरीर को थोड़ा विश्राम देने और कुछ घंटों के लिए आराम करने की सख्त आवश्यकता है ताकि वह फिर से पूरी ऊर्जा के साथ खड़े हो सकें।
शाम तक जंतर-मंतर पर वापसी का किया वादा
बीमारी की गंभीर हालत में भी अभिजीत दीपके का मनोबल कम नहीं हुआ है। उन्होंने अपने संदेश में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि उनकी यह दूरी बहुत कम समय के लिए है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भरोसा दिलाया कि कुछ घंटे आराम करने और दवाइयों का असर होने के बाद वह शाम तक हर हाल में जंतर-मंतर पर वापसी करेंगे। जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में उनके अचानक न पहुंचने से समर्थकों के बीच थोड़ी चिंता जरूर देखने को मिली थी, लेकिन उनके संदेश के सार्वजनिक होने के बाद कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली है। सोशल मीडिया पर भी उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थनाएं की जा रही हैं और लोग उन्हें सेहत पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
किसी भी सामाजिक या राजनीतिक आंदोलन में नेतृत्वकर्ता का मैदान में मौजूद रहना कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाता है। अभिजीत दीपके का यह कदम दर्शाता है कि वह अपने आंदोलन के प्रति कितने प्रतिबद्ध हैं कि अस्वस्थ होने के बावजूद वह पूरी तरह हटने के बजाय केवल कुछ घंटों का ब्रेक ले रहे हैं। पेनकिलर्स के सहारे इतने दिनों तक लगातार सक्रिय रहना शारीरिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि तेज बुखार और शरीर दर्द में आराम करना बेहद जरूरी होता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शाम तक उनका स्वास्थ्य कितना सुधरता है और वह जंतर-मंतर पहुंचकर अपने समर्थकों के बीच वापस कैसे लौटते हैं।
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