इस्तांबुल। पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने हाल ही में इस्तांबुल में हुई शांति वार्ता के बाद संघर्ष विराम जारी रखने पर सहमति जताई है। तुर्की और कतर की मध्यस्थता में हुई यह वार्ता दोनों देशों के बीच सीमा पर हुई हिंसक झड़पों के बाद हुई है, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद सबसे गंभीर सैन्य टकराव माने जाते हैं। वार्ता का घटनाक्रम और समझौते के मुख्य बिंदु अक्टूबर 19, 2025: कतर की मध्यस्थता से दोहा में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच एक अस्थायी संघर्ष विराम समझौता हुआ था। अक्टूबर 25-30, 2025: तुर्की और कतर की मध्यस्थता में इस्तांबुल में दूसरे दौर की वार्ता हुई। हालांकि, शुरुआत में पाकिस्तान के इस मांग के चलते वार्ता टूट गई कि काबुल को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अक्टूबर 31, 2025: तुर्की के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, कई दिनों की अनिश्चितता के बाद दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम जारी रखने पर सहमति जताई। निगरानी तंत्र: समझौते के तहत, शांति बनाए रखने और उल्लंघन करने वाले पक्ष को दंडित करने के लिए एक निगरानी और सत्यापन तंत्र स्थापित करने पर सहमति बनी है। अगली बैठक: नवंबर 6, 2025 को इस्तांबुल में एक उच्च-स्तरीय बैठक होगी, जिसमें इस तंत्र को लागू करने की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा। आपसी सम्मान: अफगानिस्तान के तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान के साथ आपसी सम्मान और गैर-हस्तक्षेप के आधार पर अच्छे संबंध चाहता है। सीमा पर तनाव और आरोप-प्रत्यारोप अक्टूबर 2025 की शुरुआत में, दोनों देशों के बीच डूरंड रेखा के पास कई जगहों पर घातक झड़पें हुई थीं। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी आतंकवादियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में अफगान सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। अफगानिस्तान ने इन हवाई हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और पाकिस्तान पर नागरिक हताहतों का आरोप लगाया, जबकि पाकिस्तान ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही। इन झड़पों के दौरान कई सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई, और दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आतंकवादी समूहों को पनाह देने का आरोप लगाया। कूटनीतिक पृष्ठभूमि और भारत की स्थिति यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत की यात्रा पर थे। पाकिस्तान, भारत की इस कूटनीतिक भागीदारी को क्षेत्र में अपने खिलाफ घेराबंदी के रूप में देख रहा है, जबकि भारत अफगानिस्तान में अपनी नरम-शक्ति और आर्थिक परियोजनाओं को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है। मुत्तकी की भारत यात्रा के बाद, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के राजदूत को तलब कर भारत के साथ संयुक्त बयान पर आपत्ति जताई थी। संघर्ष विराम की स्थिरता पर सवालिया निशान पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान पर टीटीपी आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है, जिसे काबुल खारिज करता है। हालांकि संघर्ष विराम हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच प्रमुख सीमा पारगमन मार्ग अभी भी बंद हैं। इससे सैकड़ों ट्रक और शरणार्थी सीमा पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा, अफगानिस्तान के गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान के धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। नवंबर 6 की वार्ता इस संघर्ष विराम की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगी। दशकों से चले आ रहे अविश्वास और परस्पर विरोधी आरोपों के कारण इस क्षेत्र में एक स्थायी शांति स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।

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