हिंदी सिनेमा के तीन बड़े अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर कानूनी विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने तीनों अभिनेताओं को इस कमर्शियल विज्ञापन में उनकी भूमिका के संबंध में कारण बताओ नोटिस थमाया है। खाद्य सुरक्षा नियामक का कहना है कि यह विज्ञापन पहली नज़र में सरोगेट एडवर्टीजमेंट का हिस्सा लगता है, जिसके ज़रिए राज्य में प्रतिबंधित पान मसाले का अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार किया जा रहा है।
कॉन्ट्रैक्ट और फीस की मांगी गई जानकारी
जारी किए गए नोटिस के अनुसार, खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने तीनों कलाकारों से उनके ब्रांड एंडोर्समेंट समझौतों की पूरी प्रति मांगी है। इसके साथ ही एफडीए ने अभिनेताओं से इस विज्ञापन अभियान की पूरी अवधि, नियम व शर्तें और इस प्रचार के बदले ली गई फीस से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी देने को कहा है। एफडीए अधिकारी इस बात की गहन जांच कर रहे हैं कि क्या यह अभियान उपभोक्ता संरक्षण और खाद्य सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन करता है।
भ्रामक विज्ञापनों पर कसता जा रहा शिकंजा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे मामले में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह कानून भ्रामक विज्ञापनों और जनता को भ्रमित करने वाले ब्रांड प्रचार पर सख्ती से रोक लगाता है। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि सेलिब्रिटी होने के नाते अभिनेताओं की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे जिस उत्पाद का प्रचार कर रहे हैं, वह किसी प्रतिबंधित वस्तु को बढ़ावा न देता हो।
जवाब के लिए मिला पंद्रह दिनों का समय
महाराष्ट्र एफडीए ने तीनों बॉलीवुड सितारों को अपना लिखित पक्ष रखने के लिए पंद्रह दिनों का समय दिया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर अभिनेताओं की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है या प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है, तो प्रशासन कानूनी प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ आगे की सख्त दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। इस नोटिस के बाद से ही मनोरंजन और विज्ञापन जगत में हलचल बढ़ गई है।
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