भारतीय सड़कों पर हर साल करीब 1.8 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से अधिकांश युवा होते हैं। इस भयानक आंकड़े को बदलने के लिए केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी वायरलेस तकनीक 'वाहन-से-वाहन' (वी2वी) संचार पर काम शुरू कर दिया है। यह कोई साधारण तकनीक नहीं है, बल्कि एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो गाड़ियों को एक-दूसरे से बात करने की शक्ति देगा। नितिन गडकरी के नेतृत्व में सड़क परिवहन मंत्रालय ने दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर इसके लिए स्पेक्ट्रम की मंजूरी भी ले ली है। आने वाले समय में हर नए वाहन में एक विशेष सिम कार्ड जैसी चिप लगी होगी, जो कोहरे, अंधे मोड़ और तेज रफ्तार ट्रैफिक के दौरान चालक को दुर्घटना से पहले ही सचेत कर देगी। यह तकनीक विशेष रूप से उन हादसों को रोकने में गेम-चेंजर साबित होगी जहां वाहन चालक को सामने या पीछे का खतरा नजर नहीं आता।

मौत के सात दिनों के भीतर मुफ्त इलाज का सुरक्षा चक्र

सड़क दुर्घटना के बाद का 'गोल्डन ऑवर' किसी की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही पूरे देश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक अभूतपूर्व कैशलेस इलाज योजना शुरू करने जा रहे हैं। इस योजना के तहत दुर्घटना के पहले सात दिनों तक प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। चंडीगढ़ और छह अन्य राज्यों में सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि पैसों की कमी या अस्पताल की देरी के कारण किसी भी भारतीय की जान नहीं जानी चाहिए। यह योजना केवल हाईवे ही नहीं बल्कि देश की किसी भी सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं को कवर करेगी, जिससे लाखों परिवारों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।

स्लीपर बसों और सख्त कानूनों से मचेगा हड़कंप

बीते कुछ महीनों में स्लीपर कोच बसों में आग लगने की घटनाओं ने सरकार को कड़े फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है। अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल अधिकृत ऑटोमोबाइल कंपनियों या सरकारी केंद्रों में ही हो सकेगा। निजी बॉडी बिल्डरों पर लगाम कसते हुए सरकार ने अनिवार्य कर दिया है कि हर स्लीपर बस में आग पकड़ने वाले सेंसर, आपातकालीन निकास और ड्राइवर की नींद की निगरानी करने वाले सिस्टम लगे होने चाहिए। इसके अलावा, आगामी बजट सत्र में मोटर वाहन अधिनियम में 61 नए संशोधन पेश किए जाएंगे। इन संशोधनों का मकसद केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि यातायात नियमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना और व्यापार करने की सुगमता को बढ़ाना है। सरकार अब अंक-आधारित प्रणाली के माध्यम से यातायात उल्लंघनों पर नजर रखेगी, जिससे बार-बार नियम तोड़ने वालों के लिए सड़कों पर गाड़ी चलाना नामुमकिन हो जाएगा।

युवाओं को बचाने और सुरक्षित भविष्य की नई रणनीति

सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में 66 प्रतिशत लोग 18 से 34 वर्ष की आयु के होते हैं। देश की इस अनमोल कार्यशक्ति को बचाने के लिए सरकार सड़क इंजीनियरिंग में सुधार से लेकर डिजिटल परमिट जारी करने तक हर स्तर पर काम कर रही है। एडीएएस (उन्नत ड्राइवर सहयोग प्रणाली) को चरणबद्ध तरीके से लागू करना और बीएनसीएपी सुरक्षा रेटिंग को बढ़ावा देना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। गडकरी ने स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक और कानून का यह संगम केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे धरातल पर उतारकर भारत को सड़क सुरक्षा के मामले में दुनिया के विकसित देशों की कतार में खड़ा किया जाएगा। अब जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि आम जनता की भी है कि वे इन उन्नत सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन करें ताकि सफर सुरक्षित हो सके।


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