कारण भारत सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एस्मा कानून लागू किया है। इसके तहत रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग केवल घरेलू एलपीजी उत्पादन के लिए करने का आदेश दिया गया है, ताकि युद्ध के दौरान रसोई गैस की आपूर्ति बाधित न हो।
पश्चिम एशिया संघर्ष और भारत
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर भारी निर्भरता रखता है, जिसके कारण सरकार ने रणनीतिक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मौजूदा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग किया है। इस कदम का सीधा उद्देश्य घरेलू स्तर पर रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले संभावित व्यवधानों से आम जनता को सुरक्षित रखना है। युद्ध की इस अनिश्चितता के बीच सरकार घरेलू संसाधनों को संरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का बड़ा खतरा
भारत की कुल एलपीजी खपत का एक विशाल हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है। वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि देश में जितनी गैस की जरूरत है, उसका आधा हिस्सा भी घरेलू स्तर पर पैदा नहीं होता। भारत के आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से आता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग का उपयोग करते हैं। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष ने इस जलमार्ग को बंद होने की कगार पर पहुंचा दिया है। यदि यह रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध होता है, तो भारत में ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था चरमरा सकती है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह सख्त निर्णय लिया है।
प्रोपेन-ब्यूटेन के उपयोग पर रोक
पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश की सभी सार्वजनिक और निजी रिफाइनरियों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के अनुसार, कच्चे तेल के शोधन के दौरान निकलने वाली प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल अब केवल एलपीजी उत्पादन के लिए ही किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट रूप से रिफाइनरियों को इन गैसों का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने या किसी अन्य औद्योगिक प्रसंस्करण के लिए करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसका अर्थ यह है कि अब कंपनियों को मुनाफे वाले औद्योगिक उत्पादों की तुलना में आम नागरिक की रसोई के लिए गैस बनाने को प्राथमिकता देनी होगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सरकारी कंपनियों को विशेष आपूर्ति
सरकार ने एस्मा के तहत यह भी अनिवार्य कर दिया है कि रिफाइनरियां उत्पादित एलपीजी को केवल तीन प्रमुख सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को ही उपलब्ध कराएंगी। मंत्रालय ने कड़े शब्दों में कहा है कि यदि कोई कंपनी इन गैसों का उपयोग पेट्रोकेमिकल के निर्माण या रूपांतरण के लिए करती पाई गई, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह रुख स्पष्ट करता है कि युद्ध जैसी आपात स्थितियों में घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस कदम से आने वाले महीनों में घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
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