नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के हजारों उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि पूर्व के आदेशों का पालन नहीं हुआ तो 22 दिन बाद अवमानना के आरोप तय किए जाएंगे। मामले की पृष्ठभूमि 2018 का फैसला: यह विवाद 2018 के उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए एक साल के भीतर नियम बनाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट से भी झटका: राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया था। अवमानना याचिका: इसके बावजूद सरकार ने आदेश का पालन नहीं किया। कर्मचारियों ने फिर से हाई कोर्ट का रुख किया और मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की। उच्च न्यायालय की सख्ती अवमानना नोटिस: नवंबर 2024 में, हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को अवमानना नोटिस जारी किया था, जिसमें उनसे जवाब मांगा गया था। चार हफ्ते का समय: जून 2025 में, मुख्य सचिव आनंद वर्धन (जो राधा रतूड़ी के बाद इस पद पर आए थे) के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर चार हफ्ते के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया। चुनाव का बहाना नहीं चलेगा: इस दौरान महाधिवक्ता ने आगामी पंचायत चुनावों का हवाला देकर समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। ताजा फटकार: हाल ही में हुई सुनवाई में सरकार के जवाब से असंतुष्ट कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर 22 दिन के भीतर आदेश का पालन नहीं हुआ तो आरोप तय कर दिए जाएंगे। सरकार का रुख और कर्मचारियों की चिंता वित्तीय बोझ का हवाला: सरकार लगातार नियमितीकरण से होने वाले वित्तीय बोझ का हवाला देती रही है, जिससे इस मामले में देरी हो रही है। कमेटी का खेल: उपनल कर्मचारी संघ का आरोप है कि सरकार नियमितीकरण को "कमेटी-कमेटी" के खेल में उलझा रही है। नई भर्तियां: उपनल कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार उन्हें हटाकर उन पदों पर नियमित भर्ती कर रही है, जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है। नियमवाली को लेकर संशय: हालांकि, सरकार ने उपनल कर्मियों के लिए नियमवाली बनाने की बात कही है, लेकिन अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। उपनल कर्मचारियों का संघर्ष लंबे समय से सेवा: उपनल के माध्यम से राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में हजारों कर्मचारी सालों से सेवाएं दे रहे हैं। समान काम-समान वेतन: 2018 के हाई कोर्ट के फैसले में यह भी कहा गया था कि जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक इन कर्मचारियों को 'समान काम के लिए समान वेतन' दिया जाए। संघर्ष की चेतावनी: उपनल कर्मचारी संघ ने नियमितीकरण पर जल्द फैसला न होने पर निर्णायक आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

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