देहरादून: उत्तराखंड में सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने लिया है, जिसके तहत शहरी विकास विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है। इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर अवज्ञा पर कार्रवाई: अगस्त 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आवारा कुत्तों को पकड़ने में बाधा डालने वालों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई होगी। राज्यों को नोटिस: आवारा कुत्तों की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था। राज्य सरकार का हलफनामा: इस आदेश के बाद, उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी कार्रवाई का हलफनामा दाखिल करने की तैयारी में यह गाइडलाइन लागू की है। नई गाइडलाइन के मुख्य बिंदु सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर प्रतिबंध: नई गाइडलाइन के तहत, सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाना प्रतिबंधित है। फीडिंग जोन की व्यवस्था: नगर पालिकाओं को प्रत्येक वार्ड में कुत्तों को खाना खिलाने के लिए विशिष्ट "फीडिंग जोन" नामित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि कुत्तों के जमावड़े को रोका जा सके। कार्रवाई का प्रावधान: देहरादून नगर निगम ने गैर-निर्धारित स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर ₹5,000 का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव भी पारित किया है। NGO और पशु प्रेमियों की प्रतिक्रिया NGO का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में आवारा कुत्तों के मामलों में भाग लेने के लिए गैर-सरकारी संगठनों और पशु प्रेमियों से ₹2 लाख और ₹25,000 जमा करने को कहा था। ऐसा न करने पर उन्हें मामले में आगे हिस्सा लेने से अयोग्य घोषित कर दिया जाता। दत्तक ग्रहण का विकल्प: हालांकि, नई नीति में पशु प्रेमियों को राहत भी दी गई है। वे अब आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए संबंधित नगर निकाय में आवेदन कर सकते हैं। आवश्यकता के कारण बढ़ते मामले: राज्य में आवारा कुत्तों द्वारा लोगों को काटने के मामले बढ़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक 24,000 से ज्यादा लोगों को कुत्तों ने काटा है। नसबंदी कार्यक्रम की धीमी गति: पिछले साल भी देहरादून में नसबंदी कार्यक्रम के बावजूद कुत्ते के काटने के मामले सामने आए थे। देहरादून में 47,000 कुत्तों की नसबंदी होने के बावजूद रोजाना 50 लोगों को कुत्ते काट रहे थे। प्रभावी कार्यान्वयन का अभाव: सुप्रीम कोर्ट ने भी अगस्त में पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 को प्रभावी ढंग से लागू न करने के लिए राज्यों को फटकार लगाई थी। आलोचना और विवाद अधिकारों का हनन: कुछ पशु प्रेमियों और कार्यकर्ताओं ने इस नीति की आलोचना की है। उनका तर्क है कि सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाना उनका अधिकार है और यह नियम अनुचित है। प्रभावी समाधान नहीं: आलोचकों का मानना है कि केवल खाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए नसबंदी और टीकाकरण जैसे कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाना होगा।

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