राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संवेदनशील जिलों के प्रशासन को पूरी तरह से मुस्तैद रहने की सख्त हिदायत दी है। मौसम के खराब मिजाज को देखते हुए सैलानियों के पहाड़ी और ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों की तरफ बढ़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा शिक्षण संस्थानों को भी बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक एहतियात बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र की ताजा भविष्यवाणियों के मुताबिक उत्तराखंड के देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के अनेक हिस्सों में भारी मानसूनी बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। इस दौरान निचले और मैदानी इलाकों में जलभराव के साथ-साथ अचानक बाढ़ आने का तगड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन परिचालन केंद्र ने संबंधित सभी जिलाधिकारियों को अपनी पूरी टीम के साथ अलर्ट मोड पर रहने के आदेश थमा दिए हैं।
सभी जिला प्रमुखों को यह ताकीद की गई है कि वे अति संवेदनशील इलाकों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखें। स्थानीय प्रशासनिक अमले को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए ताकि कहीं भी रास्ता बंद होने की सूचना मिलते ही उसे तुरंत खुलवाया जा सके। इसके अलावा पुलिस बल, राज्य आपदा मोचन बल, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग और सीमा सड़क संगठन जैसे तमाम महत्वपूर्ण विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने को कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे इन कदमों की कड़ी में रुद्रप्रयाग जिले के भीतर आने वाले तमाम शिक्षण संस्थानों और बाल विकास केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक की पढ़ाई वाले सभी सरकारी, गैर-सरकारी और निजी स्कूलों के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद रखे गए हैं ताकि बच्चों को किसी तरह के जोखिम में न डाला जाए।
प्रदेश भर में बिगड़ते मौसम के हालात को भांपते हुए सैलानियों की सुरक्षा सर्वोपरि रखी गई है, जिसके चलते उन्हें उच्च हिमालयी पगडंडियों या पर्यटन स्थलों की ओर जाने से रोक दिया गया है। मौसम विभाग के इनपुट के आधार पर आपातकालीन परिचालन केंद्र ने साफ कर दिया है कि जिन आठ जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट है, वहां जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बनाए रखने के वास्ते आवाजाही पर कड़ी नजर रखने और आपदा प्रबंधन से जुड़ी इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम प्रणाली के तमाम नामित अधिकारियों को चौबीसों घंटे चौकन्ना रहने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले रास्तों पर पोकलेन और जेसीबी जैसे जरूरी भारी उपकरणों की तैनाती पहले से ही सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि परिवहन व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "इस समय मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। कई जगहों पर लगातार बारिश हो रही है इसलिए यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से चारधाम यात्रा को स्थगित किया गया है। जैसे ही मौसम ठीक होगा, यात्रा फिर से प्रारंभ होगी..."
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