प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के बाद उत्तराखंड में पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना को लेकर प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई है। राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन ने जिलों से उपयुक्त भूमि के प्रस्ताव मांगे थे। प्राथमिक चरण में ऊधमसिंह नगर जिले द्वारा लगभग 90 हेक्टेयर भूमि का विकल्प पेश किया गया था, लेकिन न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया ने इस प्रस्ताव को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया है। बताया गया कि प्रस्तावित भूमि के बीच से रेलवे ट्रैक गुजरने के कारण सुरक्षा मानकों के तहत वहां प्लांट लगाना संभव नहीं था। इसके बाद अब प्रशासन की नजरें अन्य विकल्पों पर टिकी हैं।

​नए ठिकानों की खोज में जुटा प्रशासन

​ऊधमसिंह नगर में संभावनाएं समाप्त होने के बाद अब हरिद्वार जनपद के बुग्गावाला और उसके आसपास के क्षेत्रों में जमीन की उपलब्धता खंगाली जा रही है। परमाणु संयंत्र की स्थापना के लिए न्यूनतम 300 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। राज्य सरकार द्वारा चयनित भूमि का अंतिम परीक्षण न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन के विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद ही केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी प्राप्त होगी। हरिद्वार का यह क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण वर्तमान में रडार पर है और प्रशासन यहां की सरकारी व अन्य भूमि का विवरण जुटा रहा है ताकि जल्द से जल्द प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा सके।

​बिजली संकट का स्थायी समाधान का लक्ष्य

​उत्तराखंड वर्तमान में अपनी बिजली की जरूरतों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर है। राज्य की पीक डिमांड प्रतिदिन 2700 मेगावाट तक पहुंच जाती है, जबकि स्थानीय उत्पादन मात्र एक हजार मेगावाट के आसपास ही सिमटा रहता है। यदि प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट धरातल पर उतरता है, तो इससे एक हजार मेगावाट से अधिक बिजली पैदा होने की उम्मीद है। इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन होने से उत्तराखंड न केवल अपनी मांग पूरी कर सकेगा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों को भी बिजली बेचने की स्थिति में आ जाएगा, जिससे राज्य की आर्थिकी को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।

​निवेश की चिंता और रियल एस्टेट मार्केट

​परमाणु संयंत्र की सुगबुगाहट ने हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद यह इलाका रियल एस्टेट का बड़ा हब बनकर उभरा है। यहां जमीनों की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ी हैं। यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के रसूखदारों के निवेश का केंद्र रहा है। अब न्यूक्लियर प्लांट की चर्चाओं के बीच निवेशकों को अपनी संपत्तियों के भविष्य और कीमतों को लेकर डर सताने लगा है। सुरक्षा घेरे और परमाणु मानकों के कारण भविष्य में निर्माण कार्यों पर लगने वाली संभावित पाबंदियों ने यहां के भूमि बाजार में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।


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