- देहरादून से उत्तरकाशी तक... पूरा Uttarakhand अब सर्वोच्च खतरे वाले ज़ोन-VI में
- हिमालयी क्षेत्र को सर्वाधिक खतरे वाले ज़ोन-VI में
देहरादून। भूकंप के जोखिम को लेकर भारत में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards - BIS) ने हाल ही में नया भूकंप डिज़ाइन कोड जारी किया है और इसके साथ ही भूकंपीय ज़ोनिंग मानचित्र (Earthquake Zoning Map) को भी अद्यतन (अपडेट) किया है।
इस नए मानचित्र ने पहली बार पूरे हिमालयी क्षेत्र को सर्वाधिक खतरे वाले ज़ोन-VI में रखा है। इस बदलाव के बाद, Uttarakhand का पूरा क्षेत्र भी अब सर्वाधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हो गया है। पहले Uttarakhand के बड़े हिस्से जैसे देहरादून, ऋषिकेश और कोटद्वार ज़ोन-IV में थे, जबकि धारचूला, मुनस्यारी, नैनीताल, उत्तरकाशी जैसे क्षेत्र ज़ोन-V में रखे गए थे। नए मानचित्र के लागू होने के बाद, अब राज्य के सभी हिस्सों को भूकंप के सबसे ऊँचे खतरे की श्रेणी में रखा गया है।

मानचित्र पर वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य और ज़ोनिंग में परिवर्तन
BIS द्वारा की गई इस भूकंपीय ज़ोनिंग मैपिंग में हिमालयी क्षेत्र को लेकर सबसे बड़ा बदलाव किया गया है।
पुराने मानचित्र में Uttarakhand को दो मुख्य ज़ोन में विभाजित किया गया था:
- ज़ोन-5 (अत्यधिक जोखिम): इसमें धारचूला, मुनस्यारी और उत्तरकाशी जैसे क्षेत्र शामिल थे।
- ज़ोन-4 (उच्च जोखिम): इसमें देहरादून, ऋषिकेश, और कोटद्वार जैसे मैदानी और उप-पहाड़ी क्षेत्र शामिल थे।
हालांकि, नए आंकड़ों के आधार पर, अब पूरे Uttarakhand राज्य को ज़ोन-VI (सर्वाधिक खतरनाक) में शामिल कर दिया गया है। यह परिवर्तन इस वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है कि हिमालयी क्षेत्र में फॉल्ट लाइन एक्टिवेशन और भूकंपीय ऊर्जा का संचय अत्यधिक है, जिससे यहाँ भविष्य में बड़े भूकंप की आशंका बढ़ गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य का कोई भी ज़िला अब कम जोखिम वाले (जैसे ज़ोन-II या III) क्षेत्र में नहीं बचा है।
भूकंपीय मानचित्र का ऐतिहासिक विकास
भारत का पहला भूकंप मानचित्र जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) द्वारा 1935 में तैयार किया गया था। तब देश को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों - गंभीर, हल्का और मामूली खतरनाक क्षेत्रों में विभाजित किया गया था।
समय के साथ, BIS ने इस मानचित्र को कई बार संशोधित किया:
- 1962 में 6 ज़ोन बनाए गए।
- 1966 में 7 ज़ोन बनाए गए।
- 1970 में 5 ज़ोन (I से V) बनाए गए।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पुराने मानचित्र मुख्य रूप से केवल उन क्षेत्रों पर आधारित थे जहाँ पहले भूकंप आ चुके थे। इसके विपरीत, 2025 का नया मानचित्र अब पूरी तरह से वैज्ञानिक डेटा, फॉल्ट लाइन्स सक्रियण और कंप्यूटर मॉडलिंग पर केंद्रित है। पुराने मानचित्र में चार ज़ोन (II, III, IV, V) थे, जबकि नए मानचित्र ने पाँच ज़ोन (II, III, IV, V और नया VI) बनाए हैं।
नए ज़ोन के अनुसार खतरे का स्तर इस प्रकार है:
- ज़ोन II: बहुत कम जोखिम वाला क्षेत्र (देश का लगभग 11% क्षेत्र)।
- ज़ोन III: मध्यम खतरे वाला क्षेत्र (देश का लगभग 30% क्षेत्र)।
- ज़ोन IV: उच्च जोखिम वाला क्षेत्र (देश का लगभग 18% क्षेत्र)।
- ज़ोन V: बहुत उच्च जोखिम वाला क्षेत्र (देश का लगभग 11% क्षेत्र)।
- ज़ोन VI: सर्वाधिक खतरनाक क्षेत्र (पूरा हिमालयी क्षेत्र)।
निर्माण, सुरक्षा और नियोजन पर प्रभाव
इस महत्वपूर्ण क्षेत्रीय बदलाव के बाद, Uttarakhand में निर्माण, शहरी नियोजन और बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के एक नए, अधिक कड़े युग की शुरुआत हुई है।
चूंकि राज्य का पूरा क्षेत्र अब सर्वाधिक खतरनाक ज़ोन-VI में है, इसलिए अब इंजीनियरों और शहरी योजनाकारों को पुराने अनुमानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। निर्माण के दौरान अब वैज्ञानिक आधार पर उच्चतम सुरक्षा मानक (Highest Safety Standards) लागू किए जाएंगे। इस नए कोड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में बनने वाली प्रत्येक संरचना — चाहे वह आवासीय हो, वाणिज्यिक हो, या सरकारी बुनियादी ढाँचा — भविष्य के बड़े भूकंप के झटकों का सामना करने में सक्षम हो। यह कदम राज्य के निवासियों और संपत्ति की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और आपदा प्रबंधन की दिशा में एक अनिवार्य कदम है।
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