अमेरिकी सीनेट ने रूस की आर्थिक रीढ़ और उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता को कमजोर करने के मकसद से एक बेहद सख्त विधेयक पारित किया है। संसद के उच्च सदन में 86 के मुकाबले 11 मतों से पास हुए इस बिल के तहत रूस से कच्चे तेल और गैस का बड़ा आयात करने वाले भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक का सीमा शुल्क लगाया जा सकता है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही राजनीतिक दलों के संयुक्त समर्थन से तैयार किए गए इस प्रस्ताव का सीधा लक्ष्य रूसी ऊर्जा की बिक्री से होने वाली कमाई को सीमित करना है।

​शुरुआती मसौदे में इन देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया था, लेकिन गहन विचार-विमर्श के बाद इसे घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया। हालांकि, इस विधेयक ने अभी अंतिम कानून का रूप धारण नहीं किया है। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' में भेजा जाएगा। यदि प्रतिनिधि सभा भी इसे पारित कर देती है, तो विधेयक राष्ट्रपति ट्रम्प के पास हस्ताक्षरित होने के लिए जाएगा और उनके अनुमोदन के बाद ही यह पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो पाएगा।

​इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विशेष शक्ति भी प्रदान की गई है कि वे अमेरिका में प्रवेश करने वाले किसी भी रूसी सामान पर आगामी पांच वर्षों के लिए 500 प्रतिशत तक टैरिफ लागू कर सकते हैं। इसके अलावा, 1996 के 'ईरान प्रतिबंध कानून' की समयसीमा को वर्ष 2031 तक बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल है, जिससे ईरान के साथ व्यापार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदियों का दायरा और बढ़ जाएगा। यूरोपीय सहयोगियों के संदर्भ में सीनेट ने रुख स्पष्ट करते हुए 15 यूरोपीय राष्ट्रों को इस टैरिफ से छूट दी है, क्योंकि वे रूस से 15 प्रतिशत से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे अपनी निर्भरता खत्म कर रहे हैं।

​यह वैश्विक घटनाक्रम भारत के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है। भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया था, जो देश के कुल तेल आयात का लगभग 52.4 प्रतिशत हिस्सा था। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत में प्रयुक्त होने वाले हर दो बैरल तेल में से एक से अधिक बैरल रूस से आ रहा है। मई की तुलना में जून में यह आयात 39 प्रतिशत बढ़ा है, जिससे रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। अब सभी की निगाहें निचले सदन के फैसले पर टिकी हुई हैं।


Advertisement

---समाप्त---