वॉशिंगटन डीसी: US सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को टैरिफ और टैक्स को लेकर एक ऐतिहासिक सुनवाई हुई, जिसे खुद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के इतिहास का सबसे अहम सुनवाई बताया है। यह मामला इस बात पर केंद्रित है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के पास 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ (आयात कर) लगाने का अधिकार है, या यह अधिकार सिर्फ अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को है।
नील कत्याल की मुख्य दलील
इस हाई-प्रोफाइल केस में भारतीय मूल के जाने-माने वकील नील कत्याल (Neal Katyal) मुख्य वकील के तौर पर दलील दे रहे हैं। 54 वर्षीय कत्याल का तर्क है कि टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार US राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि कांग्रेस के पास होना चाहिए।
कत्याल ने 50 से अधिक मामलों में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में बहस की है और वह पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के कई फैसलों (जैसे मुस्लिम देशों पर लगे यात्रा प्रतिबंध और तेजी से डिपोर्टेशन की कोशिशों) के खिलाफ भी अदालत में उतर चुके हैं। इसी वजह से अमेरिकी मीडिया में उन्हें ट्रंप का कानूनी विरोधी (Trump tormentor) भी कहा जाता है।

ट्रंप ने इस मामले पर अपनी राय रखते हुए कहा था कि यह फैसला इतना अहम है कि अगर वे जीतते हैं तो US दुनिया का सबसे अमीर और सुरक्षित देश बन जाएगा। वहीं, हारने की स्थिति में देश तीसरी दुनिया के देशों जैसी स्थिति में पहुंच सकता है। हालांकि, ट्रंप ने सुनवाई में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करने के बावजूद बाद में कहा कि वह अदालत के फैसले की गंभीरता से ध्यान नहीं भटकाना चाहते।
मामले का महत्व और IEEPA
यह कानूनी लड़ाई वास्तव में राष्ट्रपति की आर्थिक शक्तियों की सीमा को परिभाषित करेगी। मामला International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के दायरे की व्याख्या पर निर्भर करता है, जिसका उपयोग ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान स्टील और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों पर व्यापक शुल्क लगाने के लिए किया था।

कत्याल और उनके मुवक्किलों (Learning Resources और hand2mind जैसी अमेरिकी कंपनियां) का तर्क है कि IEEPA को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीमित आपातकालीन उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया था, न कि US राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना बड़े पैमाने पर आर्थिक नीति बदलने का व्यापक अधिकार देने के लिए।
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कौन हैं नील कत्याल?
नील कत्याल का जन्म शिकागो में हुआ था। उनके माता-पिता (मां डॉक्टर, पिता इंजीनियर) भारत से US गए थे। उन्होंने येल लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की, जहां उन्हें मशहूर भारतीय-अमेरिकी कानूनी विशेषज्ञ अखिल अमर ने मार्गदर्शन दिया। उनकी बहन सोनिया कत्याल कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले में लॉ प्रोफेसर हैं।
एक और भारतीय वकील भी शामिल
दिलचस्प बात यह है कि इस केस में एक और भारतीय-अमेरिकी वकील प्रतीक शाह भी शामिल हैं। वे Akin Gump नाम की लॉ फर्म में सुप्रीम कोर्ट और अपीलीय मामलों के प्रमुख हैं। प्रतीक शाह उन अमेरिकी कंपनियों की ओर से राष्ट्रपति के अधिकारों को चुनौती दे रहे हैं जो इन टैरिफ से प्रभावित हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित मामलों को एक साथ सुनने का फैसला किया है। कत्याल को सिक्का उछालकर यह केस पेश करने का अधिकार मिला।
दुनिया की निगाहें
सामान्य मामलों के लिए 60 मिनट की तुलना में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई 80 मिनट तक चलेगी। अदालत में जगह खचाखच भरी रहने की उम्मीद है। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या US सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति की आर्थिक शक्तियों को सीमित करेगा या उन्हें और अधिक अधिकार प्रदान करेगा। अदालत का फैसला अमेरिकी व्यापार नीति, राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।
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