जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सितारगंज और खटीमा ब्लॉक के 59 गांवों में जमीनों की रजिस्ट्री और भू-उपयोग परिवर्तन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

जनपद में विकास की गति को नई दिशा देने के उद्देश्य से नेशनल हाईवे-125 के चौड़ीकरण का कार्य अब धरातल पर उतरने लगा है। सितारगंज से टनकपुर तक के इस महत्वपूर्ण मार्ग को फोरलेन में तब्दील करने की योजना के तहत जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया द्वारा जारी आदेश के बाद क्षेत्र के उन गांवों में हड़कंप की स्थिति है जिनकी भूमि इस हाईवे प्रोजेक्ट के दायरे में आ रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए जमीनों के क्रय-विक्रय पर रोक लगाना आवश्यक हो गया था। यह फैसला न केवल प्रोजेक्ट की लागत को नियंत्रित करने में सहायक होगा बल्कि उन बिचौलियों पर भी लगाम कसेगा जो मुआवजे के लालच में भूमि की प्रकृति बदलने का प्रयास कर रहे थे।

अधिसूचना जारी होने की तिथि और प्रशासनिक आदेश

​इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की दिशा में प्रशासनिक तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला प्रशासन द्वारा इसकी औपचारिक अधिसूचना इकतीस दिसंबर दो हजार पच्चीस को जारी कर दी गई थी। इस तिथि के तुरंत बाद नए साल की शुरुआत के साथ ही संबंधित तहसील कार्यालयों और सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों को आदेश की प्रतियां भेज दी गईं। प्रशासनिक स्तर पर एक जनवरी दो हजार छब्बीस से ही इन चिन्हित उनसठ गांवों में किसी भी प्रकार के बैनामे या रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह से ठप कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इस अवधि के दौरान इन क्षेत्रों में जमीनों का नामांतरण या प्रकृति परिवर्तन करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।


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सितारगंज क्षेत्र के प्रभावित गांवों का विवरण

​परियोजना का एक बड़ा हिस्सा सितारगंज ब्लॉक के अंतर्गत आता है जहाँ कुल अट्ठाईस गांवों को इस प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है। इन गांवों में पंडीखेड़ा, पंडी, बघौरी, बघौरा, तुकातिसौर, खैराना, खेमपुर, पचपेड़ा और कल्याणपुर जैसे महत्वपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा पुरनगढ़, झनकट का एक हिस्सा, सुनखेरीखुर्द, नबदिया, मोहम्मदगंज, सुंखरा और नानकमत्ता के सीमावर्ती इलाके भी इस सूची का हिस्सा हैं। प्रशासन ने करघाटा, भगोरी, भगोरा, गौरीखेड़ा, चिकाघाट, दोहरा, बिडीरा, इस्लामनगर और सिद्धू जैसे गांवों में भी जमीन की रजिस्ट्री को फिलहाल शून्य घोषित कर दिया है। यह कदम इसलिए भी जरूरी था क्योंकि सितारगंज के सिडकुल क्षेत्र के पास होने के कारण यहाँ जमीनों के दाम तेजी से बढ़ रहे थे और अवैध प्लॉटिंग की संभावनाएं प्रबल थीं।

खटीमा ब्लॉक के गांवों में रजिस्ट्री पर पाबंदी

​खटीमा विकासखंड के इकतीस गांवों में भी भूमि अधिग्रहण की सुगबुगाहट तेज हो गई है। यहाँ जरास उर्फ प्रतापपुर, जंगलजोथीथेर, बाराभूरिया, सडासडिया, पहेनिया, महोलिया, सुजिया और उमरू कलां जैसे प्रमुख गांवों की जमीनों पर अब ताला लग गया है। नदन्ना, बिल्हिड़ी चकरपुर, गोहरपटिया, डोगरी रेंज, उमरू खुर्द और बिगरबाग के निवासियों को भी आगामी सूचना तक अपनी जमीनों की खरीद-फरोख्त से दूर रहने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही किलपुरा रेंज, मुंडेली, ऊंचीमहोवर, खटीमा रेंज, कुटारी, फुलैया, बानूसा, हल्दी, भैंसा, पचपुरा, कुमरहा, चकरपुर, सैंजना, टेहरा, सिसैया और नौसर जैसे गांवों में भी भू-उपयोग परिवर्तन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है ताकि एनएचएआई को सर्वेक्षण और सीमांकन के दौरान किसी बाधा का सामना न करना पड़े।

भूमि स्वामियों के लिए दिशा-निर्देश और मुआवजा

​प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण से बचें क्योंकि अधिग्रहण के समय केवल उसी ढांचे का मुआवजा दिया जाएगा जो अधिसूचना जारी होने से पूर्व अस्तित्व में था। नेशनल हाईवे अथॉरिटी जल्द ही इन गांवों की जमीनों का संयुक्त सर्वे पूरा कर मुआवजे की दरों का निर्धारण करेगी। किसानों और भूमि स्वामियों को उनकी जमीन के बदले सर्किल रेट और बाजार दर के मानकों के अनुरूप उचित मुआवजा दिया जाएगा। तब तक के लिए इन गांवों के निवासियों को धैर्य रखने और प्रशासनिक प्रक्रिया में सहयोग करने का आह्वान किया गया है ताकि क्षेत्र के विकास के लिए यह फोरलेन सड़क समयबद्ध तरीके से बनकर तैयार हो सके।

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