अमेरिका में प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस के प्रमुख और खालिस्तानी चरमपंथी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के आरोपी निखिल गुप्ता के मामले में एक नया मोड़ देखने को मिला है। अमेरिकी सरकार ने खुद न्यूयॉर्क स्थित संघीय अदालत से गुजारिश की है कि निखिल गुप्ता की सजा का ऐलान फिलहाल कुछ समय के लिए टाल दिया जाए। अमेरिकी प्रशासन की ओर से जज मारेरो को लिखे गए पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि कानून के तहत पीड़ित पक्ष को सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया के दौरान अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और अपना पक्ष रखने का वैधानिक अधिकार है। इसी अधिकार को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकारी वकीलों ने अदालत से अतिरिक्त मोहलत देने की मांग की है। दिलचस्प बात यह है कि आरोपी निखिल गुप्ता के बचाव पक्ष के वकीलों ने भी इस देरी पर अपनी सहमति जताई है और दोनों पक्षों ने मिलकर नवंबर 2026 की तारीख सुझाई है।
निखिल गुप्ता पर सिद्ध हो चुके हैं संगीन आरोप
यह पूरा मामला तब दुनिया के सामने आया जब अमेरिकी जांच एजेंसियों ने निखिल गुप्ता को चेक रिपब्लिक से गिरफ्तार किया और बाद में अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया। अमेरिकी अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान निखिल गुप्ता ने इस साल फरवरी में अपना गुनाह कबूल कर लिया था। उन्होंने माना था कि पन्नू की हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए अमेरिका में एक व्यक्ति को एक लाख डॉलर की कुल राशि तय करके पंद्रह हजार डॉलर का एडवांस भुगतान किया गया था। निखिल ने यह सोचकर पैसे दिए थे कि वह व्यक्ति एक भाड़े का पेशेवर हत्यारा है, लेकिन सच्चाई यह थी कि वह व्यक्ति वास्तव में अमेरिकी खुफिया एजेंसी का एक गुप्तचर (अंडरकवर एजेंट) था। इस स्वीकारोक्ति के बाद निखिल गुप्ता पर सुपारी देकर हत्या कराने, हत्या की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संगीन मामलों में आरोप सिद्ध हो चुके हैं। इन कानूनी धाराओं के तहत उन्हें दशकों तक की जेल की सजा हो सकती है।
भारत-अमेरिका संबंधों में कूटनीतिक तनाव
इस मामले ने उस वक्त अत्यधिक कूटनीतिक तूल पकड़ लिया जब अमेरिकी न्याय विभाग ने अपनी चार्जशीट में दावा किया कि निखिल गुप्ता अकेले काम नहीं कर रहे थे। चार्जशीट के अनुसार, गुप्ता को इस साजिश में शामिल करने वाला व्यक्ति भारत सरकार की एक सुरक्षा एजेंसी से जुड़ा हुआ था, जिसे शुरुआत में 'सीसी-1' का नाम दिया गया था। जांच आगे बढ़ने पर अमेरिकी अधिकारियों ने इस व्यक्ति की पहचान विकास यादव के रूप में की, जो पहले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में कार्यरत था और कथित तौर पर उस समय भारत के कैबिनेट सचिवालय में सेवाएं दे रहा था। आरोपों के अनुसार, विकास यादव के निर्देश पर ही पन्नू को ठिकाने लगाने के लिए पूरी योजना बनाई गई थी। इस खुलासे के बाद भारत और अमेरिका के राजनयिक संबंधों में काफी खिंचाव देखने को मिला था।
अंतिम सुनवाई पर पूरी दुनिया की टिकी नजरें
अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक स्वतंत्र मामले के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे कनाडा में हुई हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से भी जोड़कर पेश किया। विदित हो कि जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसे भारत सरकार ने पहले ही आतंकी घोषित कर रखा था। कनाडाई प्रधानमंत्री द्वारा उस समय लगाए गए आरोपों और फिर अमेरिकी अदालत में दाखिल इस चार्जशीट ने मिलकर भारत के वैश्विक राजनयिक संबंधों में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। अब जबकि अमेरिकी अदालत में पीड़ित पक्ष को सुनने की तैयारी की जा रही है, तो इस मामले की अंतिम सुनवाई पर न केवल अमेरिका और भारत बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।