संभल, (उत्तराखण्ड तहलका): उत्तर प्रदेश के संभल में इन दिनों ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थलों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जिसके तहत शाही जामा मस्जिद के पास एक अत्यंत प्राचीन 'मृत्यु कूप' या 'मृत्युंजय कूप' की खुदाई शुरू हुई है। इस कूप के सामने आने से स्थानीय लोगों में जबरदस्त आस्था की लहर है, लेकिन इस खुदाई ने क्षेत्र के एक दर्दनाक इतिहास की यादों को भी ताजा कर दिया है।
पौराणिक आस्था: मोक्ष का द्वार
स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह कूप स्कंद पुराण में वर्णित 19 पौराणिक कूपों में से एक है। धार्मिक मान्यता है कि मृत्यु कूप के जल से स्नान करने और पास ही स्थित विलुप्त हो चुके महामृत्युंजय महादेव मंदिर की पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी धार्मिक महत्त्व के चलते जिला प्रशासन ने इसका जीर्णोद्धार शुरू कराया है।

1978 के दंगों का काला अध्याय
'मृत्यु कूप' की खुदाई के संदर्भ में, संभल के पुराने 1978 के दंगों का एक कुआँ भी चर्चा में आ गया है। इस कूप से जुड़ी यह अफवाह/पुष्टि थी कि दंगों के दौरान कुछ मृत व्यक्तियों के शव को इस कुएं में फेंक दिया गया था।
ताजा स्थिति और मानव कंकाल की पुष्टि:
हालांकि 'मृत्यु कूप' की हालिया खुदाई धार्मिक जीर्णोद्धार के उद्देश्य से की जा रही है, लेकिन 1978 के दंगों से जुड़े कुएं को लेकर अक्सर संशय रहा है।
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वर्तमान में हुई खुदाई के संबंध में, आधिकारिक सूत्रों ने अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं की है कि खुदाई के दौरान कोई मानव कंकाल या अवशेष बरामद हुए हैं।
अगर दंगे से जुड़े कुएं में अतीत में कोई शव फेंका गया था, तो वह एक अलग मामला है। वर्तमान में जिस 'मृत्युंजय कूप' पर आस्था का सैलाब उमड़ रहा है, उसकी खुदाई मुख्यतः पौराणिक विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया के मार्गदर्शन में यह अभियान संभल की विरासत को सहेजने के लिए चल रहा है, मगर खुदाई की कार्रवाई ने लोगों को अतीत की त्रासद घटनाओं और पौराणिक आस्था के संगम पर ला खड़ा किया है।
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