बिलासपुर में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अचानक आसमान में घने काले बादल छाए और तेज आंधी चलने लगी। देखते ही देखते मूसलाधार बारिश के साथ मोटे-मोटे ओले गिरने शुरू हो गए। करीब आधे घंटे तक आसमान से बरसी इस आफत ने पूरी तहसील में भारी तबाही मचा दी। किसानों का कहना है कि उन्होंने जिंदगी में ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा, जहां आलू-प्याज जितने बड़े ओले बरस रहे थे। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल ओलों की मार से जमीन पर बिछ गई और बालियां पूरी तरह झड़ गईं। गन्ने की फसल टूट गई और मिर्च की खेती भी बर्बाद हो गई। पिछले कुछ दिनों में यह तीसरी बार ओलावृष्टि हुई है, जिसने किसानों को खून के आंसू रोने पर मजबूर कर दिया है। टैमरा, फुलसुंघी, बिजली फार्म, गोकुलनगरी, चंदेन, नवाबगंज, जाफराबाद, सिहौर और कोटा अलीनगर समेत दर्जनों गांवों में खेतों के भीतर केवल सफेद चादर ही नजर आ रही है। कई जगहों पर खेतों में काम कर रहे ट्रैक्टरों की मजबूत छतरियां तक फट गईं।

​हाईवे पर सफेद चादर

​आधे घंटे की ओलावृष्टि का असर यह रहा कि नैनीताल हाईवे और आसपास के इलाकों में करीब एक फीट ऊंची ओलों की परत जम गई। रुद्र-बिलास चीनी मिल के पास सड़क का नजारा किसी पहाड़ी इलाके जैसा दिखने लगा। सड़क से गुजर रहे राहगीरों ने अपनी गाड़ियां किनारे रोक दीं और लोग तस्वीरें खींचने लगे। स्कूल से लौट रहे बच्चे ओलों के गोले बनाकर एक-दूसरे पर फेंकते दिखे, तो कई स्थानीय लोग थैलियों में ओले भरकर अपने घर ले जाते नजर आए। लोगों के लिए यह नजारा भले ही कौतूहल भरा रहा हो, लेकिन धरती का सीना चीरकर अन्न उगाने वाले किसानों के चेहरों पर मायूसी और दर्द साफ झलक रहा था। किसानों का कहना है कि पहले हुई दो बार की बारिश से जो थोड़ी-बहुत फसल बची थी, वह भी इस तीसरी मार के आगे खत्म हो गई। अब उनके सामने परिवार पालने और कर्ज चुकाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

​पेड़ टूटे, बत्ती गुल

​तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि नैनीताल हाईवे, माठखेड़ा रोड और रम्पुरा मार्ग पर दर्जनों पुराने पेड़ जड़ से उखड़कर सड़कों पर आ गिरे। सर्व संस्कृति स्कूल के पास पेड़ गिरने से हाईवे पर वाहनों के पहिये थम गए और लंबा जाम लग गया। धनौरा मोड़ से रम्पुरा जाने वाले रास्ते पर ज्वालापुर के पास एक बड़ा पेड़ गिरने से बिजली के दो खंभे टूट गए। इसके चलते नगर समेत करीब पचास से अधिक गांवों की बिजली गुल हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने आरा मशीनों की मदद से सड़क पर पड़े पेड़ों को कटवाकर हटवाया और नगर के भीतर ट्रैफिक रोककर वाहनों को बाईपास से निकाला। करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद यातायात बहाल हो सका।

​गांवों में पहुंचे अफसर

​आपदा की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला तुरंत प्रभावित गांवों की ओर दौड़ पड़े। उप जिलाधिकारी आनंद कुमार कन्नौजिया व तहसीलदार अक्षय कुमार ने कई गांवों का दौरा कर खेतों के हालात देखे। एसडीएम ने गुलड़िया ट्यूला गांव में क्षतिग्रस्त मकान का मुआयना किया और पीड़ित परिवार को तुरंत चूल्हा-गैस व राशन की व्यवस्था कराई। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि राजस्व कर्मियों को नुकसान के सर्वे का काम सौंप दिया गया है और रिपोर्ट तैयार होते ही शासन से आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। उधर भाकियू पदाधिकारियों ने भी गांवों का जायजा लेकर सरकार से पीड़ित किसानों को बिना देरी पूरा मुआवजा देने की मांग उठाई है।


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