रामपुर के बिलासपुर इलाके में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को पूरी तरह चौपट कर दिया है। खून-पसीने की कमाई बर्बाद होने से परेशान किसानों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों किसान सुबह दस बजे ही नेशनल हाईवे किनारे फ्लोरा गेट के पास गुरुद्वारा परिसर में जुट गए थे। किसानों का कहना था कि कुदरत की मार ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा, लेकिन सरकार या प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली। नुकसान की भरपाई, बैंक कर्ज माफी, अगली बुआई के लिए खाद-बीज का मुफ्त इंतजाम और सरकारी वसूली पर तुरंत रोक लगाने जैसी मांगों को लेकर पंचायत में तीखी चर्चा हुई। किसान घंटों तक इस इंतजार में बैठे रहे कि कोई जिम्मेदार अफसर आकर उनका दर्द सुनेगा और ज्ञापन लेगा।

अफसर नदारद, भड़का गुस्सा
दोपहर एक बजे तक जब तहसील या जिले का कोई भी जिम्मेदार नुमाइंदा ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा, तो किसानों का पारा चढ़ गया। नाराज किसान नारे लगाते हुए सीधे नेशनल हाईवे पर उतर आए और दोनों तरफ से सड़क रोक दी।

देखते ही देखते हाईवे पर ट्रकों, बसों और कारों की लंबी कतारें लग गईं। सफर कर रहे लोग गाड़ियों में फंस गए और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। हाईवे जाम होने की खबर जैसे ही महकमे को लगी, पुलिस और प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कई थानों की फोर्स को मौके की तरफ रवाना किया गया।

तीखी बहस, फिर खुला रास्ता
सड़क पर बढ़ते हंगामे को देखते हुए एसडीएम आनंद कुमार कनौजिया और सीओ पीपी सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को सड़क से हटाने की कोशिश की, लेकिन किसान बिना ठोस भरोसे के हटने को तैयार नहीं थे। इसी बीच सीओ और कुछ किसान नेताओं के बीच काफी तीखी बहस भी हो गई। माहौल गरमाता देख अफसरों ने किसानों को अलग बुलाकर समझाया और भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाया जाएगा।

करीब एक घंटे की भारी मशक्कत के बाद किसान सड़क खाली करने पर राजी हुए, जिसके बाद फंसे वाहनों को निकाला जा सका। इस मौके पर किसान नेता जगजीत सिंह गिल, मनजीत सिंह अटवाल, भानू प्रताप सिंह, सलविंदर सिंह कलसी, मोहम्मद हनीफ वारसी समेत सपा नेता अमरजीत सिंह ढिल्लों, तेजेन्द्र सिंह विर्क, पूर्व विधायक संजय कपूर, संतोष शर्मा और नदीम यार खां मौजूद रहे।
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