रामपुर जनपद में सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और समयबद्ध निस्तारण को लेकर राज्य सूचना आयोग का एक महत्वपूर्ण आदेश सामने आया है। बिलासपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अंकुर गोयल द्वारा जिले के एक स्थानीय निकाय से जन सूचना अधिकार के अंतर्गत कुछ विकासात्मक व प्रशासनिक बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी। तय समयावधि में पत्राचार का समाधान न होने पर आवेदक ने लखनऊ स्थित राज्य सूचना आयोग में अपील दाखिल की थी।

​आयोग की सुनवाई और निर्णय

​राज्य सूचना आयोग में राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ द्वारा मामले की सुनवाई की गई। पत्रावली के परीक्षण के बाद आयोग ने पाया कि आरटीआई कानून के प्रावधानों के तहत नियत अवधि में आवेदक को वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई थी। विधिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से आयोग ने आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत संबंधित अधिकारी ईओ पर 25 हजार रुपये का सांविधिक अर्थदंड अधिरोपित किया।

​प्रशासनिक स्तर पर अनुपालन के निर्देश


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​आयोग के रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नियमानुसार अर्थदंड की धनराशि संबंधित अधिकारी के वेतन से समायोजित कर सरकारी खाते में जमा कराई जाएगी। आदेश के अनुपालन हेतु संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को तय समयसीमा (तीन माह) के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिला प्रशासन को भी नियमानुसार समन्वय सुनिश्चित करने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है।

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