उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले 48 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश और तेज आंधी ने भीषण तबाही मचाई है। शनिवार को लखीमपुर खीरी में सबसे ज्यादा 342 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सीतापुर में 273.2, बांदा में 245.6 और बहराइच में 239 मिमी पानी बरसा। बांदा और हमीरपुर में एक ही दिन की बारिश के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए; हमीरपुर में 210 मिमी और बांदा में 245.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं कानपुर में 175.4 मिमी बारिश के साथ 45 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त हो गया। तेज हवाओं के झोंकों से जगह-जगह भारी पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, जिसके चलते कई शहरों और सैकड़ों गांवों में अंधेरा छा गया। सड़कों पर घुटनों तक भरे पानी ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। भीषण जलभराव के चलते रेल और हवाई यातायात पर भी गहरा असर पड़ा है; पटरियों पर पानी भरने से कई ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं और उड़ानों के समय में भी बदलाव करना पड़ा है।
हादसों का खौफनाक मंजर
लगातार हो रही बारिश और आंधी के बीच मकान व कच्ची दीवारें गिरने के हादसों में अब तक 57 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 117 से ज्यादा मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से ढह गए हैं। सबसे ज्यादा 26 मौतें अवध क्षेत्र के जिलों में दर्ज की गईं। सीतापुर और लखीमपुर खीरी में छह-छह, जबकि बहराइच और गोरखपुर में पांच-पांच लोगों की जान गई। इसके अलावा बलरामपुर, अयोध्या व हरदोई में चार-चार, बाराबंकी व हमीरपुर में तीन-तीन, गोंडा, मैनपुरी व कानपुर में दो-दो तथा अमेठी, श्रावस्ती, एटा, महोबा, बांदा, जौनपुर, संतकबीरनगर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, फर्रुखाबाद और फतेहपुर में एक-एक व्यक्ति की मलबे में दबकर मौत हुई है। कई जगहों पर हादसे उस वक्त हुए जब लोग रात में घरों के भीतर सो रहे थे। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 20 से अधिक जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही रविवार को 27 जिलों में गरज-चमक के साथ 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी देते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से जर्जर मकानों, पुराने पेड़ों और बिजली के तारों से पूरी तरह दूर रहने की अपील की है।
खेतों में तबाही, मुआवजे का निर्देश
इस बेमौसम आफत ने किसानों की सालभर की गाढ़ी कमाई पर पानी फेर दिया है। खेतों में तैयार खड़ी धान समेत खरीफ की फसलें तेज हवा और जमा पानी की वजह से जमीन पर बिछ गई हैं। इससे किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात की नजाकत को भांपते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को दफ्तर छोड़कर तुरंत ग्राउंड पर उतरने के कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया है कि प्रशासनिक टीमें गांव-गांव जाकर नुकसान का तत्काल सर्वे करें और विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपें, ताकि पीड़ित किसानों को बिना किसी देरी के राहत राशि और मुआवजा दिलाया जा सके।
पारे में भारी गिरावट, राहत की उम्मीद
भारी बरसात के चलते प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में दिन के तापमान में असामान्य गिरावट देखी गई है, जिससे सितंबर के महीने में ही लोगों को गुलाबी ठंड का अहसास होने लगा है। बरेली में अधिकतम पारा गिरकर 21.3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो जिले के सितंबर इतिहास का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया है। इसके अलावा इटावा, शाहजहांपुर, मुरादाबाद और आगरा में भी सितंबर महीने का अब तक का सबसे ठंडा दिन दर्ज हुआ। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, रविवार को तेज झोंकेदार हवाओं के साथ कुछ इलाकों में बूंदाबांदी जारी रह सकती है, लेकिन सोमवार से इस मानसूनी आफत और बारिश के दौर में धीरे-धीरे कमी आने की पूरी संभावना है।
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