​प्रदेश की बुनियादी शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उत्तराखंड सरकार ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती की काउंसलिंग प्रक्रिया में एक अभूतपूर्व परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में संपन्न हुई हालिया समीक्षा बैठक में यह तय किया गया कि सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने के लिए पूरे प्रदेश में एक ही दिन काउंसलिंग की जाएगी। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक सुगमता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए भी न्यायसंगत है जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा और योग्य शिक्षकों की तैनाती को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

​विसंगतियों को दूर करने के लिए उठाया गया सख्त कदम

​विगत कुछ वर्षों में प्राथमिक शिक्षक भर्ती के दौरान यह देखा गया कि काउंसलिंग की अलग-अलग तिथियां होने के कारण पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। डेटा विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि आवेदन करने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी ने अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिए औसतन एक दर्जन जिलों से आवेदन पत्र भरे हैं। पूर्व में जब काउंसलिंग अलग-अलग समय पर होती थी तो एक ही प्रतिभाशाली अभ्यर्थी का चयन कई जनपदों में हो जाता था। परिणाम स्वरूप अभ्यर्थी अपनी सुविधा के अनुसार एक जिले को चुनता था और शेष जिलों में उसके नाम पर आवंटित सीटें रिक्त रह जाती थीं। इन खाली सीटों को भरने के लिए विभाग को बार-बार अनुपूरक सूचियाँ जारी करनी पड़ती थीं जिससे पूरी प्रक्रिया महीनों तक खिंच जाती थी। अब एक ही दिन काउंसलिंग होने से यह विसंगति समाप्त हो जाएगी क्योंकि अभ्यर्थी को व्यक्तिगत रूप से केवल एक ही जिले में उपस्थित होने का अवसर मिलेगा।

​शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और नई नियुक्तियों पर जोर

​शिक्षा मंत्री ने इस विशेष बैठक में केवल शिक्षकों की नियुक्ति तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा बल्कि उन्होंने विभाग के चतुर्थ श्रेणी पदों पर भी शीघ्र नियुक्ति के आदेश दिए हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि विद्यालयों के बेहतर संचालन के लिए केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि सहायक कर्मचारियों का होना भी उतना ही अनिवार्य है। बैठक में उपस्थित शिक्षा महानिदेशक और प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा के निदेशकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध रखें। वर्तमान में चल रही 1670 पदों की इस भर्ती प्रक्रिया को एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है ताकि भविष्य की नियुक्तियों में भी इसी प्रकार की सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली अपनाई जा सके। इस निर्णय से राज्य के सरकारी स्कूलों में शैक्षिक वातावरण सुधरेगा और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों को भी पर्याप्त कार्यबल मिल सकेगा।


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