उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया ने आज उस समय हिंसक रूप ले लिया जब गुमनीवाला और अमित ग्राम क्षेत्र में सर्वे करने पहुंची टीम का स्थानीय निवासियों ने पुरजोर विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम जैसे ही क्षेत्र में भूमि की पैमाइश करने पहुंची, वैसे ही हजारों की संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक मोड़ ले लिया और आक्रोशित भीड़ ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पथराव शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पुलिस कर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।

ऋषिकेश में वन भूमि की नपाई के विरोध में एकत्र भीड़

​रेलवे ट्रैक और बाइपास मार्ग पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा

​गुमनीवाला और मनसा देवी रेलवे फाटक के समीप प्रदर्शनकारियों ने न केवल सड़कों को अवरुद्ध किया, बल्कि हरिद्वार-ऋषिकेश रेल मार्ग पर भी कब्जा जमा लिया। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष रेलवे ट्रैक पर बैठ गए, जिसके कारण इस रूट पर रेल सेवा पूरी तरह ठप हो गई। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वे पिछले कई दशकों से इस भूमि पर निवास कर रहे हैं और उनके पास बिजली-पानी के बिल समेत अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं। ऐसे में उन्हें उजाड़ने की किसी भी कोशिश का वे कड़ा विरोध करेंगे। रेलवे ट्रैक जाम होने से कई महत्वपूर्ण ट्रेनें बीच रास्ते में फंसी रहीं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

​प्रशासन की कार्रवाई और सुरक्षा बलों की तैनाती


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​मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के आला अधिकारी भारी पुलिस बल और पीएसी के साथ मौके पर डटे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह सर्वे प्रक्रिया सीधे तौर पर माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के क्रम में आयोजित की जा रही है, जिसे रोकना कानून का उल्लंघन है। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को समझाने और ट्रैक से हटाने की कोशिशें की गईं, लेकिन भीड़ के उग्र होने पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। वर्तमान में पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और हिंसा फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

​अतिक्रमण और सर्वे का मुख्य विवाद

​यह पूरा विवाद पशुलोक क्षेत्र की लगभग दो हजार एकड़ से अधिक वन भूमि पर बसे अमित ग्राम और आसपास की बस्तियों से जुड़ा है। लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद अब वन विभाग इस भूमि को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रहा है। स्थानीय लोगों में इस बात का गहरा डर है कि सर्वे के बाद उनके घरों को ध्वस्त कर दिया जाएगा। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ प्रशासन की वार्ता का दौर जारी है ताकि शांति व्यवस्था बहाल की जा सके।

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