शनिवार की रात राजधानी की सड़कें अचानक नारों की आवाज से गूंज उठीं। प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम के ठीक बाहर तिब्बती यूथ कांग्रेस और 'स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत' से जुड़े दर्जनों युवा इकट्ठा हो गए। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे का विरोध करते हुए इन युवाओं ने जमकर नारेबाजी की। हाथों में तिब्बती झंडे और बैनर थामे ये लोग काफी देर तक अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। अचानक हुए इस प्रदर्शन से मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए और कुछ देर के लिए यातायात बाधित हो गया।

​शी जिनपिंग के खिलाफ सख्त नारेबाजी

प्रदर्शन कर रहे युवाओं के हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर थे, जिन पर अंग्रेजी में 'शी जिनपिंग = जेनोसाइड' (नरसंहार) लिखा हुआ था। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि चीन तिब्बत पर अपना अवैध कब्जा तुरंत खत्म करे और वहां हो रहे मानवाधिकारों के हनन को रोके। तिब्बती युवाओं का गुस्सा इस बात पर था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चीनी राष्ट्रपति का स्वागत क्यों हो रहा है। उनका कहना था कि वे दुनिया के सामने तिब्बत की आवाज उठाने के लिए मजबूर हुए हैं।

​दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई


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जैसे ही पुलिस को इस विरोध की खबर मिली, आसपास के थानों की पुलिस टीम और पैरामिलिट्री फोर्स तुरंत मौके पर पहुंच गई। सुरक्षा अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और सड़क खाली करने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने तो पुलिस को सख्त कदम उठाना पड़ा। पुलिस कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को घेरकर गाड़ियों में बिठाया। इस दौरान युवाओं और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।

​50 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। सभी को पास के पुलिस स्टेशन ले जाया गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात का अंदेशा नहीं था कि इतने संवेदनशील इलाके में अचानक इस तरह का प्रदर्शन हो जाएगा। घटना के बाद भारत मंडपम और उसके आसपास के तमाम इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। आने-जाने वाली हर संदिग्ध गाड़ी की चेकिंग की जा रही है ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न बने।

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