बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा भारत की राजधानी नई दिल्ली से की गई एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पड़ोसी देश में राजनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया है। 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ने के बाद पहली बार सीधे मीडिया से मुखातिब हुईं 78 वर्षीय शेख हसीना के बयानों के बाद बांग्लादेश की सड़कों पर फिर से हिंसा और विरोध प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है।
इस पूरे घटनाक्रम की गाज बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान शाकिब अल हसन पर गिरी है। अवामी लीग के पूर्व सांसद शाकिब इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना के साथ ऑनलाइन जुड़े थे, जिसके कुछ ही घंटों बाद मागुरा शहर स्थित उनके पुश्तैनी घर पर अज्ञात उपद्रवियों ने पेट्रोल बम से हमला कर जमकर तोडफ़ोड़ की।
अवामी लीग ने शाकिब के घर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के कारण शाकिब को निशाना बनाया गया है। अवामी लीग ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में लोकतंत्र के नाम पर फासीवाद फैलाया जा रहा है और उनके नेताओं व समर्थकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने यह दावा भी किया कि बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों ने इस कार्यक्रम के प्रसारण को रोकने के लिए मीडिया को पहले ही धमकियां दी थीं।
वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने दावा किया कि वह इसी साल दिसंबर में हर हाल में बांग्लादेश वापस लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का भली-भांति अहसास है कि वतन लौटते ही उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा या उनकी हत्या करवा दी जाएगी, फिर भी वे अपने देशवासियों के पास वापस जाएंगी।
गौरतलब है कि ढाका की एक विशेष अदालत ने हिंसक प्रदर्शनों के मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई है। हसीना के इस कदम से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार बेहद नाराज है और उसने भारत के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत से एक सजायाफ्ता और भगोड़ी नेता को लाइव बोलने का मौका दिए जाने से दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को गहरा झटका लगा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद ढाका सहित कई शहरों में शेख हसीना विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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