पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक पुरानी मस्जिद पर तड़के चलाए गए बुलडोजर के बाद पूरे शहर में भारी तनाव और सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। प्रशासन द्वारा शनिवार की सुबह करीब चार बजे शुरू की गई इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान छह बुलडोजरों का इस्तेमाल किया गया। कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील इलाके को छावनी में बदल दिया गया और चारों तरफ लगभग दो सौ से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती कर दी गई ताकि कोई भी व्यक्ति मौके तक न पहुंच सके। मस्जिद का एक बड़ा हिस्सा ढहा दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में बेहद नाराजगी है।

​इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक तापमान को अचानक बहुत बढ़ा दिया है, खासकर ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव आयोजित होने वाले हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मौके का जायजा लेने सहारनपुर आ रहीं कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया और उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनाव से ठीक पहले ध्रुवीकरण की राजनीति करने के उद्देश्य से संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रही है।

​प्रशासनिक और कानूनी पक्ष की बात करें तो कलेक्ट्रेट स्थित करीब तीन हजार स्क्वायर फीट में फैली इस मस्जिद की शिकायत पिछले साल फरवरी में दर्ज कराई गई थी। इसके बाद की गई मजिस्ट्रेट जांच में इसे सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण के रूप में चिन्हित किया गया। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद हटाने और साढ़े छह करोड़ रुपए से अधिक का हर्जाना वसूलने का फैसला सुनाया था। हालांकि मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन जिला जज की अदालत से याचिका खारिज होते ही नगर प्रशासन और पुलिस ने बिना वक्त गंवाए तड़के ही कार्रवाई को अंजाम दे दिया।

​दूसरी ओर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की इस जल्दबाजी को सरासर गैरकानूनी और लोकतंत्र का हनन करार दिया है। उनका दावा है कि यह मस्जिद वर्ष 1911 से भी पहले की है और इसके दस्तावेज आज भी वहीद खान तथा याकूब खान के नाम पर दर्ज हैं। कानूनी समय सीमा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा दिए गए समय के बावजूद प्रशासन ने रात के अंधेरे में चारों तरफ से घेराबंदी करके यह कदम उठाया। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे इस लड़ाई को सड़क पर नहीं बल्कि देश के कानून और संविधान के दायरे में रहकर मजबूती से लड़ेंगे।


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