रुद्रपुर, 04 नवंबर। ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर शहर में सड़क पर हुए विवाद के मामले में पत्रकार रूपेश कुमार को अदालत से बड़ी राहत मिल गई है। सीजेएम कोर्ट में मामले की निष्पक्ष सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दे दी गई। इसके साथ ही पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी से जानलेवा हमले से जुड़ी गंभीर धारा को भी हटा दिया गया है, जिससे मामले में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सके। इस फैसले के बाद मीडिया जगत में संतोष देखा जा रहा है।

​रात के विवाद से शुरू हुआ मामला

​यह पूरा घटनाक्रम देर रात का बताया जा रहा है, जब पत्रकार रूपेश कुमार अपनी कार से घर वापस लौट रहे थे। पत्रकार रूपेश कुमार का सीधा आरोप है कि उन पर सुनियोजित तरीके से घात लगाकर हमला किया गया था और उनकी हर गतिविधि पर काफी पहले से नजर रखी जा रही थी। उनका कहना है कि उन्हें फंसाने के मकसद से एक झूठी और मनगढ़ंत कहानी तैयार की गई। वहीं दूसरी तरफ से दी गई तहरीर पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रूपेश कुमार के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर लिया और उन्हें हिरासत में ले लिया था।

​कोतवाली में दर्ज कराया विरोध


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​पत्रकार रूपेश कुमार को हिरासत में लिए जाने की खबर फैलते ही स्थानीय पत्रकारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया। बड़ी संख्या में लोग रुद्रपुर कोतवाली पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस मामले को लेकर पूरे प्रदेश के पत्रकार समुदाय में भारी रोष देखने को मिला। रूपेश कुमार ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पूरी रात पुलिस ने किसी को भी उनसे मिलने नहीं दिया। उन्होंने बताया कि इस दौरान वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक प्रतिनिधियों और यहां तक कि साथी पत्रकारों तक को मिलने की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उनका मेडिकल परीक्षण तक नहीं कराया गया और पुलिस की यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक हस्तियों के इशारे पर की गई।

​अदालत से मिली बड़ी राहत

​मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के कानूनी पहलुओं को ध्यान से सुना गया। अदालत ने पूरे घटनाक्रम और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों को देखते हुए रूपेश कुमार की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। इसके साथ ही मुकदमे से जानलेवा हमले से संबंधित धारा भी हटा दी गई। कोर्ट के इस फैसले से पुलिस की जल्दबाजी वाली कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए हैं, वहीं निष्पक्ष जांच की उम्मीद मजबूत हुई है।

​दबाव के आगे नहीं झुकने का संकल्प

​अदालत से राहत मिलने के बाद पत्रकार रूपेश कुमार ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार और प्रशासन पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि भले ही उनके चैनल को बंद कराने के लिए मनमाने हथकंडे अपना लिए जाएं, लेकिन वे पत्रकारों की आवाज को कभी दबा नहीं सकते। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रूपेश कुमार जैसे कलमकारों की आवाज हर हाल में गूंजती रहेगी, चाहे वह प्रिंट मीडिया का माध्यम हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का।

​उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके लिए सारे मंच बंद भी कर दिए जाएं, तब भी जनता के बीच जाने के रास्ते कभी बंद नहीं हो सकते। सड़कों के कोने और शहर के चौराहे हमेशा मौजूद रहेंगे, जहां खड़े होकर वे पूरी ताकत के साथ सच की आवाज उठाते रहेंगे। प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करने वालों को सीधी चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग डरा-धमकाकर पत्रकारिता को खामोश करना चाहते हैं, वे कान खोलकर सुन लें कि 'अनसुनी आवाज' को बंद कराने की कोशिश करने वालों की अब चैन की नींद उड़ने वाली है। उन्होंने भरोसा जताया कि सच और न्याय की इस लड़ाई में समाज का हर वर्ग उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

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