लखनऊ, 02, नवंबर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ आंचलिक कार्यालय ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े धन-शोधन मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान के खिलाफ चल रही जांच के तहत रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय की भूमि और भवनों को कुर्क कर लिया गया है। कुर्क की गई संपत्ति का पुस्तक मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इसका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1170 करोड़ रुपये बताया गया है।

​जमीनों और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

​जांच एजेंसी की यह कार्रवाई रामपुर के अज़ीम नगर थाने में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर शुरू हुई थी। आरोप है कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया था। इसके अलावा ग्राम सिंघानखेड़ा में शत्रु संपत्ति के करीब 34 एकड़ में फैले भूखंडों पर भी अवैध कब्जे की बात सामने आई थी, जिसे बाद में प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया था। साथ ही यह भी पाया गया कि लोक निर्माण और विकास कार्यों के लिए जारी सरकारी बजट को विश्वविद्यालय के निजी परिसर के कार्यों में लगाया गया।

​सरकारी ठेकों और चंदे का खेल


Advertisement

​ईडी की पड़ताल में सामने आया कि निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों से प्राप्त धनराशि को चंदे के रूप में वापस ट्रस्ट के खातों में डाला गया। विधायक व विधान परिषद सदस्य निधि से भी विश्वविद्यालय परिसर में काम कराए गए। जांच में यह भी तथ्य मिला कि सरकार द्वारा ओबीसी छात्रावास, अस्पताल और पंडाल निर्माण के लिए दी गई मंजूरियों के नियमों में बाद में बदलाव कर सरकारी संपत्ति को निजी नियंत्रण में सौंप दिया गया। उस समय मोहम्मद आज़म खान संबंधित विभागों के मंत्री थे।

​मूल्यांकन में सामने आया अंतर

​जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर के भवनों और भूमि की कुल लागत करीब 499.09 करोड़ रुपये पाई गई। इसके उलट ट्रस्ट द्वारा आयकर रिटर्न में पूंजीगत व्यय बहुत कम दर्शाया गया था। जांच में पाया गया कि वैध स्रोतों से केवल 72.63 करोड़ रुपये का हिसाब ही स्पष्ट हो सका, जबकि शेष 426.46 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि के स्रोत का संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी आधार पर एजेंसी ने इस संपत्ति को कुर्क करने का निर्णय लिया है।

---समाप्त---