रुद्रपुर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ और उनके पार्षद पुत्र सौरभ राज बेहड़ पर तीखे हमले किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पार्षद पर हुआ हमला कोई बाहरी घटना नहीं बल्कि विधायक परिवार द्वारा रची गई एक सोची-समझी साजिश थी। शुक्ला ने आरोप लगाया कि इस पूरे नाटक का एकमात्र उद्देश्य राजनीति में सहानुभूति बटोरना और बेटे के लिए सरकारी गनर की सुविधा प्राप्त करना था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विधायक अब अपनी बहू को बदनाम करके मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं जबकि वह निर्दोष महिला अस्पताल में अपने पति की सेवा कर रही थी। शुक्ला के अनुसार विधायक ने स्वयं स्वीकार किया था कि वह पुलिस के मुल्जिम को तब तक नहीं मानेंगे जब तक असली 'आका' न मिल जाए, जिस पर शुक्ला ने पलटवार किया कि बेहड़ जी खुद को शीशे में देख लें तो उन्हें इस घटना का आका नजर आ जाएगा।

विरोधियों का उत्पीड़न और सरकार को कलंकित करने की कोशिश

राजेश शुक्ला ने इस प्रकरण को भाजपा सरकार और स्थानीय अधिकारियों को बदनाम करने की एक गहरी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि इस झूठे हमले की आड़ में न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं बल्कि खुद कांग्रेस के भी कई कार्यकर्ताओं का मानसिक और पुलिसिया उत्पीड़न किया गया। शुक्ला ने पार्षद पति राजेश शर्मा का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें सपरिवार कई घंटों तक बेवजह चौकी में बिठाकर प्रताड़ित किया गया। यही नहीं षड्यंत्र के तहत पुलिस को उनके आवास पर भी भेजा गया। उन्होंने कहा कि इस षड्यंत्र का उदेश्य विरोधियों को कानूनी पचड़ों में फंसाकर राजनीतिक रूप से खत्म करने का था। शुक्ला ने इसे एक ऐसा 'राजनीतिक पाप' करार दिया जो कभी माफी के योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक को लगा था कि यह राज कभी नहीं खुलेगा और वे इसकी आड़ में आंदोलन खड़ा करके सरकार की छवि खराब करते रहेंगे।

नैतिकता के आधार पर इस्तीफे और जेल भेजने की मांग

पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने पुलिस खुलासे का हवाला देते हुए कहा कि अब यह पूरी तरह प्रमाणित हो चुका है कि पार्षद सौरभ राज बेहड़ ने स्वयं अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस हमले की पटकथा रची थी। उन्होंने विधायक तिलक राज बेहड़ की नैतिकता को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यदि उन्हें वास्तव में अपनी गलती का अहसास है, तो उन्हें अपने बेटे को भी अन्य आरोपियों के साथ जेल भेजना चाहिए। शुक्ला ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि इस घिनौने षड्यंत्र के उजागर होने के बाद भी सौरभ का इस्तीफा नहीं लिया गया, जो यह साफ करता है कि विधायक स्वयं इस पूरे कांड के मुख्य संरक्षक हैं। उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि जनता के विश्वास के साथ किया गया यह खिलवाड़ अक्षम्य है और इस घटना ने विधायक परिवार के असली चेहरे को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है, जो खुद को पीड़ित बताकर सत्ता और प्रशासन पर दबाव बनाने का खेल खेल रहे थे।


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