छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने न केवल कानून व्यवस्था की धमक को पुनः स्थापित किया है बल्कि अपराधियों के मन में खौफ का नया अध्याय लिख दिया है। तमनार ब्लॉक के लिबरा चौक पर जिस महिला आरक्षक के साथ अमानवीय बर्बरता की गई थी, उस मामले के मुख्य आरोपी चित्रसेन साव को पुलिस ने आखिरकार दबोच लिया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस का जो रूप दिखा उसने यह साफ कर दिया कि वर्दी का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपी को सिग्नल चौक से लेकर न्यायालय तक पैदल ले जाया गया, जहाँ कानून के रखवालों ने उसी की भाषा में उसे जवाब दिया।
सड़क पर निकला दरिंदगी का सार्वजनिक हिसाब
मुख्य आरोपी चित्रसेन साव का जुलूस निकालते समय पुलिस ने सांकेतिक रूप से समाज के सामने उसे बेनकाब किया। आरोपी के चेहरे पर कालिख और लिपस्टिक पोती गई थी और उसके गले में चप्पलों की माला लटकी हुई थी। जिस आरोपी ने भीड़ का फायदा उठाकर एक महिला पुलिसकर्मी की गरिमा को तार-तार किया था, उसे बीच सड़क पर उठक-बैठक लगवाई गई। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों की भारी मौजूदगी रही, जिनके सामने आरोपी 'पुलिस हमारी बाप है, वर्दी फाड़ना पाप है' के नारे लगाता दिखा। अब तक इस शर्मनाक मामले में कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि पुलिस की टीमें एक अन्य फरार आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।
27 दिसंबर की वह काली सुबह और रूह कंपाने वाला वीडियो
यह पूरा विवाद जेपीएल कोयला खदान सेक्टर-1 की जनसुनवाई के विरोध से शुरू हुआ था, जहाँ चौदह गांवों के हजारों ग्रामीण धरने पर बैठे थे। लेकिन विरोध के नाम पर जो हुआ उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। उग्र भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात एक महिला आरक्षक को घेर लिया और उसके साथ वह दरिंदगी की जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। भीड़ ने महिला के कपड़े फाड़कर उसे अर्धनग्न कर दिया और इस जघन्य कृत्य का वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया। वीडियो में वह लाचार महिला आरक्षक हाथ जोड़कर 'भाई, मुझे छोड़ दो' की गुहार लगा रही थी, लेकिन उन्मादी भीड़ पर उस चीख का कोई असर नहीं हुआ।
खदान विरोध की आड़ में अराजकता का नंगा नाच
तमनार के गारे पेलमा सेक्टर-1 में जनसुनवाई के दौरान करीब चार हजार ग्रामीणों के बीच छिपे कुछ उपद्रवियों ने कलेक्टर और एसपी की मौजूदगी में भी आगजनी और पथराव किया। हालात इतने बेकाबू हो गए थे कि जिंदल प्रबंधन को जनसुनवाई रद्द करने का फैसला लेना पड़ा। लेकिन इस विरोध के पीछे छिपे अपराधियों ने वर्दी को निशाना बनाकर शासन को खुली चुनौती दी थी। पुलिस की इस ताजा कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन किसी महिला की अस्मत और वर्दी की मर्यादा से खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून के पास कोई रहम नहीं है।
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