राजस्थान का शांत दिखने वाला बाड़मेर जिला इन दिनों एक ऐसी सनसनीखेज वारदात से दहल उठा है, जिसने समाज के रसूखदार लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। यहां प्यार और सहमति के नाम पर जिस्म का सौदा नहीं, बल्कि ब्लैकमेलिंग का एक खतरनाक जाल बुना जा रहा था। एक युवती ने बड़ी ही चालाकी से कानून के रखवाले यानी एक वकील को अपने जाल में फंसाया और फिर शुरू हुआ फिरौती का वह गंदा खेल, जिसकी गूंज अब पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। यह मामला महज एक हनीट्रैप नहीं है, बल्कि एक सुव्यवस्थित अपराध का वह चेहरा है जो बंद कमरों के भीतर मासूमियत का मुखौटा पहनकर मासूमों और रसूखदारों को अपना शिकार बना रहा था।
वकील को मोहरा बनाकर रची गई साजिश
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब आरोपी युवती ने एक स्थानीय वकील से संपर्क साधा और उसे मुलाक़ात के बहाने एक होटल में बुलाया। शुरुआती बातचीत के बाद दोनों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध बने, लेकिन वकील इस बात से पूरी तरह अनजान था कि वह जिस पल को निजी समझ रहा था, उसे कैमरे की नजरों से कैद किया जा रहा था। जैसे ही वकील होटल के कमरे से बाहर निकला, उसके मोबाइल पर एक नोटिफिकेशन आया जिसने उसके पैरों तले जमीन खिसका दी। युवती ने चंद मिनटों पहले बनाया गया अश्लील वीडियो उसे भेजकर सीधे 40 लाख रुपये की डिमांड रख दी। यह मांग इतनी बड़ी थी कि किसी के भी होश उड़ जाएं, लेकिन वकील ने डरने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।
फ्लैट बना था ब्लैकमेलिंग का अड्डा
जब यह मामला जिले के आला पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा, तो प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए एक स्पेशल टीम का गठन किया। पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपी युवती को हिरासत में लिया और जब पूछताछ की परतें खुलीं, तो एक डरावना सच सामने आया। आरोपी युवती शहर में एक फ्लैट किराए पर लेकर रह रही थी, जो असल में कोई रिहायशी ठिकाना नहीं बल्कि ब्लैकमेलिंग का हेडक्वार्टर बन चुका था। जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि वह पहले भी शहर के कई नामी गिरामी लोगों को इसी तरह अपने जाल में फंसाकर उनसे करोड़ों रुपये ऐंठ चुकी है। पुलिस को अंदेशा है कि इस घिनौने धंधे के पीछे वह अकेली नहीं है, बल्कि एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है जो पर्दे के पीछे से इस पूरी पटकथा को लिखता था।
सफेदपोशों की चुप्पी और पुलिसिया कार्रवाई
फिलहाल पुलिस ने अदालत से युवती का दो दिन का रिमांड हासिल किया है ताकि उन तमाम चेहरों का पता लगाया जा सके जो इस ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का हिस्सा हैं। सबसे बड़ा सवाल उन पीड़ितों पर भी खड़ा होता है जो समाज में बदनामी के डर से अब तक खामोश रहे और इस युवती की तिजोरी भरते रहे। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि तकनीक और सोशल मीडिया के इस दौर में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। बाड़मेर पुलिस अब इस गैंग की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि भविष्य में कोई और इस तरह के हनीट्रैप का शिकार न बन सके।
---समाप्त---