​पंजाब में सेना और पुलिस के बीच उपजे एक अभूतपूर्व विवाद में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मार्च 2025 में पटियाला में एक सेवारत सैन्य अधिकारी के साथ हुई मारपीट के मामले में सीबीआई ने पंजाब पुलिस के चार निरीक्षकों (Inspectors) के खिलाफ मोहाली की विशेष अदालत में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​यह विवाद पटियाला के एक ढाबे की पार्किंग में मामूली कहासुनी से शुरू हुआ था। आरोप है कि पंजाब पुलिस के उच्चाधिकारियों ने सेवारत कर्नल पुष्पेंद्र सिंह बाथ और उनके बेटे पर जानलेवा हमला किया। इस हिंसक झड़प में कर्नल का हाथ टूट गया था, जबकि उनके बेटे के सिर में गंभीर चोटें आई थीं।

​सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में मुख्य आरोपी रोनी सिंह के अलावा हरजिंदर सिंह, शमिंदर सिंह और हैरी बोपराई को नामजद किया है। हालांकि, जांच एजेंसी ने चार्जशीट में गंभीर चोट पहुँचाने और अवैध रूप से बंधक बनाने जैसी धाराएं तो लगाई हैं, लेकिन 'हत्या के प्रयास' (Attempt to Murder) की धारा को हटा दिया है, जो अब कानूनी विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।


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​कानूनी लड़ाई और कोर्ट का हस्तक्षेप

​शुरुआत में स्थानीय पुलिस द्वारा की गई जांच पर पीड़ित परिवार ने पक्षपात के आरोप लगाए थे। मामला जब पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय पहुँचा, तो अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए जुलाई 2025 में जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।

​"यह मामला केवल दो पक्षों की लड़ाई नहीं, बल्कि कानून के रक्षकों की जवाबदेही का प्रश्न है।" — उच्च न्यायालय (जुलाई 2025)

​आरोपी अधिकारियों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी सीबीआई जांच को बरकरार रखा, जिससे पंजाब पुलिस के लिए मुश्किलें बढ़ गईं।

​वर्दी के सम्मान पर उठते सवाल

​पंजाब में इस घटना ने नागरिक समाज और पूर्व सैनिकों के बीच गहरा रोष पैदा कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि एक कर्नल रैंक के अधिकारी के साथ पुलिस का व्यवहार ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा भगवान भरोसे है।

​अब सबकी नजरें मोहाली की विशेष अदालत पर टिकी हैं। यह मामला न केवल आरोपियों के भविष्य का फैसला करेगा, बल्कि भविष्य में पुलिस और सेना के बीच समन्वय और पुलिस की जवाबदेही के लिए एक बड़ी नजीर साबित होगा।

---समाप्त---