पंजाब की सियासत में इन दिनों 'बदलाव' की परिभाषा एक विवादित मोड़ लेती नजर आ रही है। जिस पारदर्शिता और जवाबदेही के वादे के साथ आम आदमी पार्टी ने सत्ता की बागडोर संभाली थी, आज उसी पारदर्शिता की मांग करने वाले नागरिकों और पत्रकारों को पुलिसिया कार्रवाई की जद में ले लिया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल और उससे जुड़े खर्चों पर सवाल उठाना आरटीआई कार्यकर्ता माणिक गोयल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मिंटू गुरुसरिया समेत कई पत्रकारों को भारी पड़ गया है। सरकार ने इन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि सत्ता की ऊंची उड़ानों पर उठने वाली हर तार्किक नजर को कानून के शिकंजे से दबाया जा सकता है।
यह समूचा विवाद उस समय गरमाया जब कुछ जागरूक नागरिकों ने फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा साझा करते हुए यह दावा किया कि मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा के दौरान भी पंजाब सरकार का हेलीकॉप्टर सक्रिय था। हालांकि पुलिस का तर्क है कि इन लोगों ने उपलब्ध डेटा की गलत व्याख्या कर सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इस कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसकी गोपनीयता है। लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस ने यह मामला दिसंबर माह में ही दर्ज कर लिया था, मगर इसे पूरी तरह गुप्त रखा गया। पुलिस की यह रहस्यमयी चुप्पी और फिर अचानक की गई कानूनी कार्रवाई राज्य की न्याय प्रणाली और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
माणिक गोयल जैसे कार्यकर्ताओं का संघर्ष यह भी उजागर करता है कि सरकार सूचना के अधिकार कानून के प्रति कितनी असहज है। पिछले कई सालों से हेलीकॉप्टर और सरकारी हवाई जहाजों के खर्च से जुड़े आंकड़ों के लिए आरटीआई लगाई जा रही हैं, लेकिन सरकार लगातार डेटा साझा करने से बचती रही है। जब लोकतांत्रिक और आधिकारिक रास्ते बंद कर दिए जाते हैं और नागरिक उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर सवाल पूछते हैं, तो उन्हें अपराधी की तरह पेश करना स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए एक भयावह मिसाल है। विपक्ष ने भी सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की है और इसे प्रेस की आजादी का गला घोंटने वाला कृत्य बताया है। अगर प्रशासन के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे आंकड़ों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। वर्तमान स्थिति दर्शाती है कि सरकार अब जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों के मुंह बंद करने की नीति पर चल पड़ी है, जिसके खिलाफ अब चंडीगढ़ की सड़कों पर विरोध की गूँज सुनाई देगी।
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