स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख नेटवर्क पार्क ग्रुप के खिलाफ आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की देशव्यापी कार्रवाई का असर सीमांत इलाके में भी साफ दिखाई दिया। ग्रुप के वित्तीय मामलों की कड़ियां तलाशते हुए केंद्रीय एजेंसियों की टीमें सोमवार सुबह करीब पांच बजे बिलासपुर की पॉश बत्रा कॉलोनी पहुंची थीं। लगातार 90 घंटे तक चली मैराथन जांच के बाद गुरुवार रात करीब 11 बजे अधिकारी गाड़ियों में सवार होकर रवाना हो गए। चार दिनों की इस लंबी पड़ताल के दौरान इलाके में खासी हलचल रही, लेकिन टीमें जाने के बाद भी स्थानीय कारोबारी हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं अब भी गर्म हैं।

​केंद्रीय एजेंसियों की इस पूरी कार्रवाई का मुख्य केंद्र पार्क ग्रुप ही रहा, जिसके देश भर में करीब 17 ठिकानों पर एक साथ सर्च अभियान शुरू किए जाने की बात सामने आई थी। इसी ग्रुप की पड़ताल आगे बढ़ते-बढ़ते बिलासपुर तक आ पहुंची। दरअसल, पार्क ग्रुप ने कुछ समय पहले उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित मेडिसिटी अस्पताल का सौदा किया था। अस्पताल के पूर्व संचालक डॉ. दीपक छाबड़ा और उनके कारोबारी साझेदार रोहिताश बत्रा के साथ हुए इसी वित्तीय लेन-देन के तार जोड़ने के लिए एजेंसियां सीधे उनके आवासों तक पहुंच गईं और दोनों परिसरों को घेरे में ले लिया।

​चार दिनों तक चली इस सघन पड़ताल के दौरान अधिकारी परिसरों के भीतर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड्स की जांच में जुटे रहे। सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग की टीम ने दोनों जगहों से कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। वहीं छापे के दौरान नगदी, ज्वेलरी या अन्य कीमती सामान जब्त करने को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सूत्रों का कहना है कि जो भी दस्तावेज और सामान टीम ने कब्जे में लिए हैं, उनकी बाकायदा पूरी सूची तैयार कर उस पर हस्ताक्षर करवाए गए और परिजनों को नियमानुसार रिसीविंग सौंपी गई।

​आसपास के लोगों के मुताबिक रात करीब 11 बजे जांच टीमों की गाड़ियां कॉलोनी के गेट से बाहर निकल गईं। चार दिनों से घरों के भीतर कैद कारोबारी परिवारों ने टीमें जाने के बाद राहत की सांस ली। जैसे ही टीम के जाने की खबर फैली, दोनों कारोबारियों के घरों पर शुभचिंतकों, मिलने-जुलने वालों और नाते-रिश्तेदारों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। लोग परिवारों का हालचाल जानने और उनका ढांढस बंधाने देर रात तक पहुंचते रहे।


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​फिलहाल बिलासपुर में ऑन-ग्राउंड सर्च भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन जानकारों का कहना है कि पार्क ग्रुप के खिलाफ शुरू हुई यह जांच अभी शांत नहीं हुई है। अधिकारी यहां से जुटाए गए वित्तीय हिसाब-किताब और जरूरी कागजात अपने साथ ले गए हैं, जिनका पार्क ग्रुप के अन्य ठिकानों से मिले रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। यह भी साफ नहीं है कि पार्क ग्रुप के बाकी 17 ठिकानों पर जांच पूरी तरह खत्म हो गई है या वहां अभी काम बाकी है। स्थानीय लोग और कारोबारी जगत अब इस बात का इंतजार कर रहा है कि जांच एजेंसियां इस पूरे मामले पर कब अपना पक्ष सामने रखती हैं, ताकि 90 घंटे की इस लंबी कार्रवाई की असली तस्वीर साफ हो सके।

नोट: यह समाचार उपलब्ध जानकारी और सूत्रों के हवाले से सामने आए तथ्यों पर आधारित है। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किसी भी आरोप की पुष्टि आधिकारिक जांच या सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्षों से ही मानी जानी चाहिए।

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