क्षेत्र के भानु प्रताप पब्लिक स्कूल में विजयादशमी का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। स्कूल परिसर में आयोजित रंगारंग कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी कला और अभिनय से समां बांध दिया। नर्सरी और एलकेजी के नन्हे-मुन्ने बच्चों से लेकर कक्षा ग्यारहवीं तक के विद्यार्थियों ने अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। पूरा परिसर 'जय श्री राम' के जयकारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। माहौल ऐसा था मानो मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श मंच पर साक्षात उतर आया हो।
मनमोहक मंचन
कार्यक्रम की शुरुआत छोटे बच्चों की प्यारी प्रस्तुतियों से हुई, जिन्होंने अपनी मासूम अदाओं से सबका मन मोह लिया। इसके बाद स्कूली बच्चों ने रामायण के कई प्रसंगों का सजीव मंचन किया। भगवान राम के जीवन मूल्यों, मर्यादा और सत्य की राह को दर्शाते नाटक ने लोगों को भावुक कर दिया। वहीं मां दुर्गा के नौ रूपों पर आधारित नाटिका में छात्राओं ने नारी शक्ति के तेज और साहस का ऐसा प्रदर्शन किया कि सभागार में मौजूद हर शख्स कायल हो गया। नृत्य शिक्षक अनुराग और अंजलि की कोरियोग्राफी में सजे इन नृत्यों में बच्चों का तालमेल देखते ही बनता था। मंच का संचालन पवन तिवारी ने अपने खास अंदाज में किया और अंत तक दर्शकों को बांधे रखा।
आंतरिक बुराइयों पर जीत
कार्यक्रम के दौरान स्कूल की व्यवस्थाओं को संभालने में कोऑर्डिनेटर नेहा कंसवाल, रजनीश राणा और महिपाल की टीम पूरी तरह मुस्तैद नजर आई। इस मौके पर स्कूल के प्रधानाचार्य महेश चंद्रा ने बच्चों की प्रतिभा की खुलकर सराहना की और पूरी टीम की पीठ थपथपाई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि दशहरा सिर्फ रावण का पुतला फूंकने या जश्न मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अवगुणों को खत्म करने का दिन है। जब तक हम अपने अंदर के क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और आलस्य को नहीं मारेंगे, तब तक सही मायने में जीत हासिल नहीं होगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं से भगवान राम के आदर्शों को अपनी दिनचर्या में उतारने और बड़ों का आदर करने की सीख दी। कार्यक्रम के अंत में सभी को त्योहार की शुभकामनाएं देकर एक नई सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प दिलाया गया।
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