भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की कड़वाहट के बीच अक्सर ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो मानवीय भावनाओं और कानूनी पेचीदगियों को आमने-सामने खड़ा कर देती हैं। पंजाब की 48 वर्षीय सरबजीत कौर का मामला भी कुछ ऐसा ही है, जो श्रद्धा की दहलीज से शुरू होकर अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी दांव-पेंच में फंस गया है। नवंबर 2025 में सरबजीत कौर गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व में शामिल होने के लिए एक जत्थे के साथ पाकिस्तान पहुंची थीं। ननकाना साहिब की पवित्र धरती पर माथा टेकने के बाद जब पूरा जत्था वापस लौटा, तो सरबजीत की गैरमौजूदगी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। वह अचानक गायब हो गई थीं, लेकिन इस रहस्य से पर्दा तब उठा जब खबर आई कि उन्होंने सीमा पार अपने प्यार के लिए धर्म और देश दोनों को पीछे छोड़ने का फैसला कर लिया है।
निकाह, धर्मांतरण और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
लापता होने के अगले ही दिन यानी 5 नवंबर को सरबजीत ने इस्लाम कुबूल किया और अपना नया नाम नूर हुसैन रख लिया। उन्होंने पाकिस्तानी नागरिक नासिर हुसैन के साथ निकाह कर लिया। कई दिनों तक यह जोड़ा पुलिस और एजेंसियों की नजरों से बचकर छिपा रहा, लेकिन कानून की पकड़ से ज्यादा समय तक दूर रहना मुमकिन नहीं था। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व चेयरमैन सरदार मोहिंदरपाल सिंह ने इस मामले में दखल देते हुए लाहौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने तर्क दिया कि सरबजीत का वीजा नवंबर में ही समाप्त हो चुका है, लिहाजा उनका पाकिस्तान में ठहरना पूरी तरह अवैध है। अंततः 4 जनवरी 2026 को ननकाना साहिब के पास पेह्रेवाली गांव से खुफिया एजेंसियों ने इस जोड़े को हिरासत में ले लिया।
वाघा बॉर्डर पर रुक गई घर वापसी की राह
विदेशी अधिनियम 1946 और एफआईए के कड़े नियमों के तहत सरबजीत के डिपोर्टेशन की फाइल तैयार की गई। 5 जनवरी 2026 की शाम को वाघा बॉर्डर पर हलचल तेज थी। भारतीय अधिकारियों को सौंपने की तमाम औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं और सरबजीत को सीमा तक लाया भी गया था। लेकिन ऐन वक्त पर पाकिस्तानी उच्चाधिकारियों के एक आदेश ने पूरी प्रक्रिया को ठप कर दिया। बिना किसी स्पष्ट कारण के सरबजीत को वापस ले जाया गया। यह अनिश्चितता न केवल सरबजीत के भविष्य पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि इस संवेदनशील मामले में पर्दे के पीछे कोई बड़ा कानूनी या कूटनीतिक पेंच फंस गया है।
कानूनी उलझन और भविष्य की चुनौतियां
याचिकाकर्ता के वकील अली चंगेजी सिंधु के अनुसार, पुलिस और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड ने आरोपियों को संघीय जांच एजेंसी को सौंप दिया था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान सरकार सरबजीत को उसकी नई पहचान और शादी के आधार पर रियायत देगी या फिर कानून का डंडा उसे भारत वापस भेज देगा। फिलहाल सरबजीत उर्फ नूर हुसैन पाकिस्तान की कस्टडी में हैं और यह मामला अब महज एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि दो देशों के बीच नियमों और भावनाओं की एक जटिल जंग बन चुका है।
---समाप्त---