देश के न्यायिक ढांचे को हिला देने वाली एक सनसनीखेज घटना में गुरुवार का दिन अफरा-तफरी और खौफ के नाम रहा। भारत के पांच से अधिक राज्यों की जिला और उच्च अदालतों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। बिहार के पटना से लेकर हिमाचल की पहाड़ियों और पंजाब के मैदानों तक, हर जगह एक ही तरह का पैटर्न देखने को मिला। अज्ञात हमलावरों ने अदालतों की आधिकारिक ईमेल आईडी पर संदेश भेजकर दावा किया कि परिसर के भीतर आरडीएक्स जैसा घातक विस्फोटक रखा गया है। इस सूचना के सार्वजनिक होते ही न्याय के मंदिरों में भगदड़ मच गई और आनन-फानन में अदालतों की कार्यवाही रोककर जज, वकीलों और आम नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। यह घटना महज एक अफवाह है या किसी बड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा, इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां अभी किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं, लेकिन जिस व्यापक स्तर पर ईमेल भेजे गए हैं, वह एक सोची-समझी रणनीति की ओर इशारा करता है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के न्यायिक गलियारों में सुरक्षा घेरा

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इस धमकी का गहरा असर देखा गया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और राजनांदगांव जिला न्यायालयों में जैसे ही ईमेल की खबर फैली, सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया। मध्य प्रदेश के रीवा जिला न्यायालय को भी इसी तरह की धमकी मिली, जिसके बाद डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्तों ने पूरे परिसर को खंगाला। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर सेल की मदद से उस आईपी एड्रेस को ट्रैक किया जा रहा है जिससे ये संदेश भेजे गए थे। शुरुआती जांच में यह किसी शरारती तत्व की हरकत लग सकती है, लेकिन जिस तरह से एक साथ कई राज्यों को निशाना बनाया गया है, उसने राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के लिए मजबूर कर दिया है।

बिहार की अदालतों में आरडीएक्स का दावा और पटना में हाई वोल्टेज ड्रामा

बिहार की राजधानी पटना सहित गया और किशनगंज की अदालतों में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण रही। पटना सिविल कोर्ट में भेजे गए ईमेल में स्पष्ट रूप से आरडीएक्स विस्फोटक का जिक्र किया गया था, जिसके बाद जिला जज के आदेश पर पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया। गया में स्थिति और भी गंभीर थी जहां कोर्ट परिसर के सभी प्रवेश द्वारों को सील कर दिया गया और आम जनता के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई। एसपी सागर कुमार खुद किशनगंज कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि अदालतों जैसे संवेदनशील स्थानों पर रोजाना हजारों की भीड़ होती है, ऐसे में सुरक्षा और जांच की प्रक्रिया को एक साथ चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा है।

ओडिशा और हिमाचल हाईकोर्ट तक पहुंचा धमकियों का सिलसिला

यह खौफ सिर्फ जिला अदालतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालयों को भी निशाना बनाया गया। शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आधिकारिक ईमेल पर आई धमकी ने प्रशासन को हिला कर रख दिया। पुलिस और बम स्क्वाड ने चप्पे-चप्पे की तलाशी ली, हालांकि घंटों की जांच के बाद कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई। यही हाल ओडिशा हाईकोर्ट का रहा जहां अफरा-तफरी के बीच वकीलों और कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। इन धमकियों ने अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को भी उजागर किया है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारी डिजिटल सुरक्षा इतनी कमजोर है कि कोई भी आसानी से न्यायिक कार्य में इस तरह का अवरोध पैदा कर सकता है।


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पंजाब में ईमेल के जरिए दहशत का नया दौर और साइबर जांच

पंजाब के रूपनगर, फिरोजपुर, मोगा और लुधियाना में भी इसी तरह की धमकियों ने दहशत पैदा कर दी। लुधियाना में तो सुरक्षा की गंभीरता को देखते हुए मॉक ड्रिल तक आयोजित की गई। पंजाब पुलिस अब उन तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है जिनके जरिए ये ईमेल भेजे गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की धमकियां देश की न्याय प्रणाली को बाधित करने और सुरक्षा एजेंसियों को उलझाने का एक नया हथियार बन गई हैं। साइबर सेल अब उन विदेशी सर्वरों या वीपीएन सेवाओं की जांच कर रही है जिनका उपयोग पहचान छिपाने के लिए किया गया हो सकता है। फिलहाल देश भर की अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कर दी गई है और हर आने-जाने वाले पर पैनी नजर रखी जा रही है।

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