जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग करने वाले भाजपा नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए इसे विनाशकारी कदम बताया है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि अगर ये लोग जम्मू का बेड़ा गर्क करना चाहते हैं तो बेशक करें। मुख्यमंत्री के अनुसार जब भाजपा की परंपरागत राजनीति विफल होने लगी, तो उन्होंने जम्मू को अलग करने का राग अलापना शुरू कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में जब राज्य का पुनर्गठन हो रहा था और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया था, तब भाजपा ने जम्मू को अलग राज्य क्यों नहीं बनाया। उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर अब यह मांग की जा रही है, क्या इसके पीछे सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण की मंशा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिनसे लद्दाख नहीं संभल पा रहा, वे अब जम्मू को भी बर्बादी की ओर धकेलने की साजिश रच रहे हैं।
शिक्षा और खेल में धर्म का हस्तक्षेप
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सिलेंस में मुस्लिम छात्रों के दाखिले को लेकर हो रहे विरोध पर मुख्यमंत्री का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन बच्चों ने अपनी मेहनत और योग्यता से परीक्षा पास कर सीट हासिल की है, उन पर किसी का कोई अहसान नहीं है। उमर अब्दुल्ला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर वहां पढ़ाई के बजाय सियासत होनी है, तो हमें ऐसा मेडिकल कॉलेज ही नहीं चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इन बच्चों को किसी अन्य सुरक्षित संस्थान में समायोजित किया जाए, क्योंकि किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चों को डर के माहौल में भेजना संभव नहीं है। इसी तरह खेल के मैदानों में भी मजहब तलाशने की प्रवृत्ति पर उन्होंने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल और क्रिकेट की टीमों के चयन में पक्षपात के आरोप वही लोग लगा रहे हैं जिन्हें हर चीज में सिर्फ मजहब दिखता है।
आरक्षण नीति और भविष्य की चुनौतियां
आरक्षण नीति के जटिल मुद्दे पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने गेंद सीधे उपराज्यपाल के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने अपनी उप-समिति की सिफारिशों को मंजूरी देकर फाइल राजभवन भेज दी है, इसलिए अब इस पर फैसला लेना उपराज्यपाल का काम है। प्रदेश के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने साल के शुरुआती दिनों की अनिश्चितता का जिक्र किया। उन्होंने पिछले वर्ष के आतंकी हमलों और प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और भारी बारिश का उदाहरण देते हुए कहा कि हालात कब बिगड़ जाएं, इसका पूर्वानुमान लगाना कठिन है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना है। आगामी 2 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र को सफलतापूर्वक संपन्न करना और पर्यटन सीजन की बेहतर शुरुआत सुनिश्चित करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है।
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