नेपाल के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले बीरगंज में सांप्रदायिक तनाव की आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। कल की छिटपुट हिंसा के बाद प्रशासन ने आज मंगलवार को भी ढील देने के बजाय पाबंदियों को और सख्त कर दिया है। जिला प्रशासन कार्यालय परसा ने आज सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक के लिए कर्फ्यू को प्रभावी रूप से जारी रखने का आदेश दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रशासन किसी भी कीमत पर भीड़ को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं दे रहा है। बीरगंज की गलियों में जहां कभी व्यापारिक हलचल रहती थी, वहां आज केवल सुरक्षाबलों के जूतों की आहट सुनाई दे रही है। शहर के हृदय स्थल घंटाघर से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक सन्नाटा पसरा हुआ है, जिसे केवल सायरन की आवाजें ही तोड़ रही हैं।
आज की स्थिति और प्रशासनिक सख्ती
मंगलवार सुबह होते ही स्थानीय निवासियों को उम्मीद थी कि शायद कुछ घंटों की राहत मिलेगी, लेकिन जिला मजिस्ट्रेट के नए आदेश ने साफ कर दिया कि खतरा अभी टला नहीं है। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कल रात भी कुछ इलाकों में संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं, जिसके बाद गश्त बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बलों को आदेश दिया गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति कर्फ्यू का उल्लंघन करता पाया जाए या भड़काऊ गतिविधि में शामिल दिखे, तो उसके खिलाफ तत्काल प्रभाव से बल प्रयोग किया जाए। शहर के मुख्य बाजारों और संवेदनशील चौराहों को सील कर दिया गया है। इंटरनेट सेवाओं पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि अफवाहों के जरिए हिंसा की नई लहर को भड़कने से रोका जा सके।
भारत-नेपाल व्यापार और रक्सौल की स्थिति
बीरगंज में लगे इस कर्फ्यू का सबसे बड़ा और सीधा असर भारत-नेपाल के बीच होने वाले व्यापार पर पड़ा है। रक्सौल बॉर्डर के जरिए होने वाली मालवाहक ट्रकों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। सीमा पर हजारों की संख्या में ट्रक फंसे हुए हैं और व्यापारियों को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है। भारतीय सुरक्षा बल भी इस स्थिति को लेकर पूरी तरह मुस्तैद हैं। भारतीय क्षेत्र में तैनात अधिकारियों का कहना है कि वे नेपाल के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं ताकि सीमावर्ती गांवों में शांति बनी रहे। दोनों देशों के बीच चलने वाले छोटे वाहनों और पैदल यात्रियों की जांच को भी पहले के मुकाबले दस गुना सख्त कर दिया गया है ताकि कोई भी असामाजिक तत्व सीमा का लाभ उठाकर तनाव न बढ़ा सके।
शांति की अपील और भविष्य की चिंता
नेपाल सरकार और स्थानीय नागरिक समाज के लोग शांति बहाली के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शाम छह बजे के बाद स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी और तभी तय होगा कि रात में ढील दी जाए या नहीं। बीरगंज में रह रहे परिवारों के लिए राशन और दवाओं की किल्लत होने लगी है, लेकिन प्रशासन का तर्क है कि जान बचाना उनकी पहली प्राथमिकता है। साम्प्रदायिक सौहार्द को चोट पहुँचाने वाले तत्वों की पहचान की जा रही है और अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। शहर का माहौल अभी भी किसी ज्वालामुखी की तरह है, जहां ऊपरी तौर पर शांति दिख रही है लेकिन भीतर ही भीतर रोष और डर का माहौल बना हुआ है।
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