ईरान की धरती एक बार फिर अपने ही नागरिकों के खून से लाल हो रही है। इस बार विद्रोह की वजह कोई हिजाब या धार्मिक कानून नहीं, बल्कि वह खाली पेट है जिसने जनता को मौत के खौफ से आजाद कर दिया है। पिछले एक हफ्ते से जारी यह आंदोलन अब एक हिंसक गृहयुद्ध जैसी शक्ल अख्तियार कर चुका है। मानवाधिकार संगठनों ने पुष्टि की है कि सुरक्षा बलों की अंधाधुंध फायरिंग और लाठीचार्ज में अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जो अपने माता-पिता के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद में सड़कों पर निकले थे। लेकिन विडंबना यह है कि प्रशासन इन्हें 'शहीद' नहीं, बल्कि 'विदेशी एजेंट' करार दे रहा है।
ट्रंप की धमकी ने आग में डाला घी
ईरान के भीतर मचे इस कोहराम के बीच सात समुद्र पार वाशिंगटन से आई एक धमकी ने माहौल को और अधिक विस्फोटक बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ईरान ने अपने ही नागरिकों का कत्लेआम नहीं रोका, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। ट्रंप ने अपनी मिसाइलों को 'लॉक्ड एंड लोडेड' बताते हुए सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप के संकेत दिए हैं। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ईरान को आँखें दिखाई हैं, लेकिन इस बार उनका लहजा पहले से कहीं अधिक आक्रामक है। तेहरान के लिए मुश्किल यह है कि उसे एक तरफ अपनी भूखी जनता से निपटना है और दूसरी तरफ दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के साये में अपनी सत्ता बचानी है।
पेट की आग और महंगाई का कोहराम
इस विद्रोह की असली जड़ें ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था में छिपी हैं। पिछले साल परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने ईरान की कमर तोड़ दी है। दुकानों में सामान नहीं है, अस्पतालों में दवाइयां खत्म हो रही हैं और मुद्रास्फीति ने आम आदमी की थाली से रोटी तक छीन ली है। जब जनता ने बगावत का झंडा बुलंद किया, तो शासन ने इसे इंटरनेट बंद करके और गोलियां चलाकर दबाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे भूख से मरने के बजाय गोली खाकर मरना बेहतर समझते हैं। तेहरान से लेकर मशहद तक, हर छोटे-बड़े शहर में लोग सरकारी इमारतों को निशाना बना रहे हैं।
सरकार का अड़ियल रुख और बढ़ता संकट
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस पूरे संकट को अमेरिका और इजरायल की साजिश करार दिया है। सरकारी मीडिया लगातार यह प्रोपेगेंडा फैला रहा है कि प्रदर्शनकारी हथियारबंद उपद्रवी हैं। हालांकि, जमीन से आ रही तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। लोग खाली बर्तन लेकर सड़कों पर नाच रहे हैं और तानाशाही के अंत के नारे लगा रहे हैं। जैसे-जैसे मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ट्रंप की मिसाइल धमकी हकीकत में बदलने का खतरा गहराता जा रहा है। दुनिया इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ ईरान के भीतर की यह चिंगारी पूरे मध्य-पूर्व को एक भीषण युद्ध की आग में झोंक सकती है।
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