संयुक्त राज्य अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाला फैसला सुनाया है जिससे दुनिया भर के इमिग्रेशन गलियारों में हलचल मच गई है। ट्रंप प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि आगामी 2 अप्रैल 2026 से कुल 50 देशों के नागरिकों को अमेरिका का बी1 (बिजनेस) और बी2 (टूरिस्ट) वीजा प्राप्त करने के लिए पहले 15,000 डॉलर की सुरक्षा राशि यानी वीजा बॉन्ड जमा करना होगा। यह कदम उन देशों के यात्रियों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है जिनकी वजह से अमेरिका में अवैध रूप से ठहरने वाले लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा था। प्रशासन का तर्क है कि यह वित्तीय गारंटी यात्रियों को समय पर अपने देश वापस लौटने के लिए मजबूर करेगी।

​सुरक्षा बॉन्ड का वित्तीय गणित

​अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा बुधवार 18 मार्च 2026 को जारी किए गए बयान के अनुसार यह बॉन्ड केवल उन्हीं वीजा धारकों को वापस किया जाएगा जो अपनी यात्रा पूरी कर अमेरिका की शर्तों के अनुसार समय पर स्वदेश लौट जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति वीजा मिलने के बाद यात्रा नहीं करता है तो भी उसे यह राशि वापस मिल जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस नीति से हर साल लगभग 800 मिलियन डॉलर के टैक्सपेयर्स के पैसे बचेंगे क्योंकि एक अवैध व्यक्ति को देश से बाहर निकालने की प्रक्रिया में सरकार को लगभग 18,000 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। अब तक के शुरुआती परीक्षण में देखा गया है कि इस नियम के तहत आने वाले 97 फीसदी लोग समय पर वापस लौट गए हैं।

​किन देशों पर गिरेगी गाज

​इस सख्त नियम के दायरे में आने वाले देशों की सूची में कई एशियाई और अफ्रीकी देश शामिल हैं। ताजा बदलाव के तहत 12 नए देशों को जोड़ा गया है जिनमें कंबोडिया, इथियोपिया, जॉर्जिया, ग्रेनेडा, लेसोथो, मॉरीशस, मंगोलिया, मोजाम्बिक, निकारागुआ, पापुआ न्यू गिनी, सेशेल्स और ट्यूनीशिया शामिल हैं। ये देश अब उन 38 देशों के साथ खड़े होंगे जिन पर पहले से ही यह नियम लागू है जैसे कि बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, नाइजीरिया और युगांडा। सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या भारत और पाकिस्तान के यात्रियों को भी यह भारी भरकम राशि जमा करनी होगी। वर्तमान आंकड़ों और सूची के अनुसार भारत और पाकिस्तान का नाम फिलहाल इस अनिवार्य बॉन्ड वाली लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।

​अवैध प्रवास पर अंतिम प्रहार

​ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भविष्य में इस सूची का विस्तार 'इमिग्रेशन जोखिम कारकों' के आधार पर किया जा सकता है। यानी जिन देशों के नागरिक भविष्य में वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रुकेंगे उन्हें भी इस बॉन्ड सिस्टम के तहत लाया जा सकता है। पिछली सरकार के अंतिम वर्ष में लगभग 44 हजार लोग इन 50 देशों से आकर अमेरिका में अवैध रूप से रुक गए थे जिसे वर्तमान प्रशासन एक बड़ी चुनौती मानता है। यह नई व्यवस्था विशेष रूप से लघु अवधि के वीजा धारकों के लिए एक कड़ी परीक्षा की तरह होगी जो व्यापार या पर्यटन के नाम पर अमेरिका में दाखिल होकर वहीं बसने की कोशिश करते हैं।


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