उत्तराखंड के जनपद उधमसिंह नगर अंतर्गत रुद्रपुर का रम्पुरा क्षेत्र इन दिनों खौफ और आक्रोश के केंद्र में है। 4 मार्च 2026 की उस काली शाम ने एक साधारण परिवार की खुशियों को मातम और डर में बदल दिया, जब सनातन कन्या इंटर कॉलेज की 11वीं कक्षा की छात्रा को अपनी अस्मत बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। आरोप है कि पड़ोस के ही रसूखदार युवकों ने न केवल सरेराह छात्रा के साथ अभद्रता की, बल्कि विरोध करने पर मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ दीं। घर की चौखट को पार कर हमलावरों ने जिस तरह से महिलाओं और अबोध बच्चों पर डंडों और बेल्टों से प्रहार किया, वह सभ्य समाज के माथे पर कलंक की तरह है। इस वीभत्स घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी जब कानून के रक्षक मौन रहे, तो पीड़ित परिवार के सब्र का बांध टूट गया।
खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर सामने आ रहा है। पीड़ित परिवार का स्पष्ट आरोप है कि हमलावर पक्ष को एक महिला भाजपा पार्षद का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण कोतवाली पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। घटना के समय आपातकालीन नंबर 112 पर सूचना देने के बावजूद मदद न मिलना और घायलों का उचित मेडिकल परीक्षण न कराया जाना दाल में कुछ काला होने का संकेत देता है। जब रक्षक ही राजनीतिक दबाव में आकर भक्षक के मददगार दिखने लगें, तो न्याय की उम्मीद धूमिल होने लगती है। पीड़ित परिवार आज भी आरोपियों की धमकियों के साए में जीने को मजबूर है, जबकि आरोपी खुलेआम घूमकर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।
राजकुमार ठुकराल की आंदोलन की चेतावनी
न्याय की इस लड़ाई में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने मुखर होकर नेतृत्व संभाला है। एसएसपी कार्यालय के बाहर हुए जोरदार प्रदर्शन के दौरान ठुकराल ने सरकार के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के नारे को खोखला करार दिया। उन्होंने सीधे तौर पर सत्ताधारी दल के नेताओं पर अपराधियों को पनाह देने का आरोप लगाया। ठुकराल का कहना है कि रम्पुरा जैसे घने मोहल्ले में दिनदहाड़े बेटियों के कपड़े फाड़ना और पूरे परिवार को लहूलुहान कर देना एक जघन्य अपराध है, जिसे राजनीतिक रसूख की आड़ में दबाया नहीं जा सकता। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि शीघ्र ही आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया और पीड़ित परिवार को पुख्ता सुरक्षा नहीं मिली, तो यह आक्रोश जिला मुख्यालय से लेकर सड़क तक एक बड़े जनांदोलन का रूप लेगा।
एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद न्याय की जागी उम्मीद
भारी दबाव और जन आक्रोश को देखते हुए एसएसपी अजय गणपति ने मामले की गंभीरता को समझा है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने पीड़ित पक्ष की व्यथा सुनी और तत्काल प्रभाव से संबंधित कोतवाल को निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई के निर्देश जारी किए। हालांकि, स्थानीय जनता के मन में अब भी संशय बरकरार है कि क्या पुलिस बिना किसी भेदभाव के भाजपा पार्षद के करीबियों पर शिकंजा कस पाएगी। वर्तमान में पीड़ित छात्रा और उसकी मां की हालत मानसिक और शारीरिक रूप से दयनीय बनी हुई है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि इस मामले की जांच किसी उच्च अधिकारी की देखरेख में हो ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को उनके किए की कड़ी सजा मिल सके।
प्रदर्शन करने वालों में मौजूद रहे
अजय नारायण सिंह, चन्द्रपाल कोली, दिनेश कोली, राम सेवक कोली, आशीष श्रीवास्तव, ललित सिंह बिष्ट, राजीव कोली, सोनम कोली, देश राज कोली, गब्बर कोली, दानवीर कोली, रेखा, आशा कोली, रजनी कोली, संतोष कोली, चन्द्रवती कोली, गुड्डो देवी, रेखा कोली, माया देवी, कमला देवी, शोभा कोली, राजवती कोली, हरदेई कोली, ओमप्रकाश कोली, प्रेम शंकर कोली, सुभाष कोली, राजा राम कोली, लक्ष्मण कोली, विजय रानी, श्रवण कोली, रामकुमार, अनुज कोली, बब्बू कोली, निहाल सिंह, आकाश कोली आदि मौजूद रहे।
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