मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सतत मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड का चिकित्सा शिक्षा विभाग वर्तमान में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट विजन है कि उत्तराखण्ड के प्रत्येक नागरिक को सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हों, साथ ही प्रदेश के युवाओं को घर के पास ही उच्चस्तरीय चिकित्सा शिक्षा के अवसर मिलें। इसी कड़ी में वर्ष 2025 चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए उपलब्धियों का वर्ष बनकर उभरा है, जहाँ मानव संसाधन की कमी दूर करने से लेकर मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने तक हर दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। विभाग के ये प्रयास न केवल तात्कालिक जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार कर रहे हैं।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस वर्ष नियुक्तियों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा। राजकीय मेडिकल कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए 07 स्थायी प्राचार्यों की नियुक्ति की गई और संकाय सदस्यों की कमी को दूर करने के लिए 18 प्रोफेसर तथा 36 एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किए गए। इसके साथ ही 439 असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के सापेक्ष 142 का चयन पूर्ण कर लिया गया है, जिससे कॉलेजों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आएगा। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली नर्सिंग सेवाओं को मजबूती देने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 1248 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए हैं। इसके अलावा ओटी टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट के पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
नर्सिंग कॉलेजों के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए विभाग ने प्रोफेसर और ट्यूटर की नियुक्तियों के साथ-साथ कई नए पदों का सृजन किया है। चमोली, पौड़ी, अल्मोड़ा और हल्द्वानी के नर्सिंग कॉलेजों में एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई है, जिससे राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त नर्सिंग विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। बुनियादी ढांचे के विकास की बात करें तो राजकीय दून मेडिकल कॉलेज और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में विशाल और आधुनिक ऑडिटोरियम का लोकार्पण किया गया है। दून चिकित्सालय में चार नए इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक हाइपरबारिक ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा शुरू की गई है, जो गंभीर मरीजों के उपचार में क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।
विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने देहरादून और हल्द्वानी में सुपर स्पेशियलिटी विभाग स्थापित किए हैं। इन विभागों के लिए अनुभवी डॉक्टरों को आकर्षित करने के उद्देश्य से वेतनमान में ऐतिहासिक वृद्धि करते हुए प्रोफेसर के लिए 5 लाख और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 2 लाख रुपये तक का मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है। राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए पीजी सीटों में भी कुल 68 सीटों की वृद्धि की गई है। हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में अब आई बैंक और कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे नेत्र रोगियों को अब दिल्ली या अन्य राज्यों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
राज्य में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार युद्ध स्तर पर जारी है। रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य आधे से अधिक पूरा हो चुका है, जबकि हल्द्वानी में बन रहे प्रदेश के पहले कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी 41 प्रतिशत तक पहुँच गया है। चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि विभाग केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसी समग्र व्यवस्था तैयार कर रहा है जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और आधुनिक उपचार एक साथ मिल सकें। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राज्य में प्रति एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर उपलब्ध कराना है, ताकि उत्तराखण्ड चिकित्सा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।
उत्तराखण्ड में चिकित्सा शिक्षा का स्वर्णिम काल: मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सुदृढ़ होती स्वास्थ्य सेवाएँ
संक्षेप: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सतत मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड का चिकित्सा शिक्षा विभाग वर्तमान में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट विजन है कि उत्तराखण्ड के प्रत्येक नागरिक को सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हों, साथ ही प्रदेश के युवाओं को घर के पास ही उच्चस्तरीय चिकित्सा शिक्षा के अवसर मिलें। इसी कड़ी में वर्ष 2025 चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए उपलब्धियों का वर्ष बनकर उभरा है...
Dec 20, 2025
Harvinder Sidhu | उत्तराखण्ड तहलका, देहरादून
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