सीमांत क्षेत्र खटीमा में बुधवार की शाम लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रही। उद्योग व्यापार मंडल के चुनाव की सरगर्मी उस समय हिंसक मोड़ पर आ गई जब मतगणना स्थल पर मौजूद समर्थकों ने मर्यादाएं लांघ दीं। 4 फरवरी को शांतिपूर्ण मतदान के बाद जब शाम को वोटों की गिनती शुरू हुई, तो शुरुआती रुझान आते ही माहौल में कड़वाहट घुलने लगी। जैसे ही कोषाध्यक्ष पद के आंकड़े स्पष्ट हुए, हार की आशंका से घिरे कुछ गुटों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए शोर-शराबा शुरू कर दिया। देखते ही देखते मतगणना कक्ष के भीतर और बाहर समर्थकों की भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस बल के लिए उन्हें नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी तुषार सैनी को व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करना पड़ा।

​उप जिलाधिकारी के सख्त रुख से शांत हुए उपद्रवी समर्थक

​मतगणना स्थल पर मची अफरा-तफरी के बीच जब प्रशासनिक अपील का असर कम होने लगा, तब एसडीएम तुषार सैनी ने स्वयं हाथ में डंडा थामकर मोर्चा संभाला। उनके कड़े तेवर और पुलिस की सक्रियता के बाद ही हंगामा कर रहे लोग पीछे हटने को मजबूर हुए। अधिकारियों का मानना था कि यदि उस समय कड़े फैसले नहीं लिए जाते तो जान-माल का नुकसान हो सकता था। मतगणना केंद्र के भीतर जिस तरह से मेजें पलटने और नारेबाजी की नौबत आई, उसने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन अराजक तत्वों को खदेड़ा जो प्रक्रिया में बाधा डाल रहे थे। फिलहाल पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को दोबारा होने से रोका जा सके।

​मतपेटियां सील होने के बाद राजनीतिक दलों में बढ़ी तकरार


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​हंगामे के कारण अध्यक्ष और महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की मतगणना पूरी नहीं हो पाई। प्रशासन ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बची हुई तीन मतपेटियों को एक सुरक्षित कक्ष में रखकर सरकारी सील लगा दी है। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इन पेटियों की सुरक्षा के लिए अब प्रत्याशियों के समर्थक भी पहरा दे रहे हैं ताकि कोई हेरफेर न हो सके। इस पूरे प्रकरण ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के स्थानीय दिग्गज इस विवाद में कूद पड़े हैं। जहां एक पक्ष इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष हार के डर से उपजा हताशापूर्ण व्यवहार कह रहा है। खटीमा के मुख्य चौक पर रात भर समर्थकों की नारेबाजी चलती रही, जिससे आम जनजीवन और व्यापारियों में डर का माहौल बना हुआ है।

​चुनावी परिणाम और भविष्य की रणनीति पर सस्पेंस बरकरार

​व्यापार मंडल की इस जंग में फिलहाल किसी की जीत और किसी की हार का आधिकारिक ऐलान नहीं हो सका है। कोषाध्यक्ष पद की गिनती तो पूरी हो चुकी है लेकिन जब तक अध्यक्ष और मंत्री पद के भाग्य का फैसला नहीं होता, तब तक यह गतिरोध जारी रहने की संभावना है। व्यापारिक हितों के लिए लड़ा जाने वाला यह चुनाव अब प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासन नई तारीख का ऐलान कर सकता है या फिर सुरक्षा के कड़े घेरे में दोबारा गिनती शुरू करवाई जाएगी। फिलहाल व्यापारियों के बीच इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि उनके प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया गया है। सबकी निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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