रिपोर्ट- गुड्डू खान (खटीमा)। उत्तराखंड के खटीमा क्षेत्र में शिक्षा के नाम पर निजी विद्यालयों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। लोहिया हेड रोड स्थित एक प्रमुख निजी विद्यालय सहित कई अन्य संस्थानों पर आरोप लगा है कि वे सत्र समाप्त होने से पहले ही आगामी सत्र की एडवांस फीस जमा करने के लिए अभिभावकों पर अनैतिक दबाव बना रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि फीस समय पर न मिलने की स्थिति में छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं में बैठने से रोकने की धमकी दी जा रही है। इस प्रकार की कार्यप्रणाली न केवल शिक्षा के नियमों के विरुद्ध है, बल्कि छोटे बच्चों के कोमल मन पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव और तीखा विरोध
स्कूलों की इस हठधर्मिता से आक्रोशित भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और पूर्व छात्र संघ पदाधिकारियों ने आज एकजुट होकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया कि विद्यालय प्रशासन द्वारा अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने खंड शिक्षा अधिकारी को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा नेताओं का कहना है कि शिक्षा को व्यापार बनाने वाले इन संस्थानों के खिलाफ यदि कड़ा रुख नहीं अपनाया गया, तो यह स्थिति मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए असहनीय हो जाएगी।
एडवांस फीस के पीछे निजी स्कूलों की सोची-समझी रणनीति
शिकायतकर्ताओं ने स्कूलों की इस रणनीति के पीछे छिपे वास्तविक उद्देश्य को भी उजागर किया। उनका तर्क है कि सत्र पूरा होने से पहले ही एडवांस फीस मांगना एक सोची-समझी योजना का हिस्सा है। इसके माध्यम से निजी स्कूल यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि छात्र चाहकर भी अगले सत्र में विद्यालय न बदल सके और उसी संस्थान में पढ़ने को विवश हो। यह सीधे तौर पर अभिभावकों की चयन की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। पूर्व छात्र संघ अध्यक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इन विद्यालयों को कानूनी नोटिस भेजा जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।
मान्यता रद्द करने की मांग और भविष्य में उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे प्रकरण में अभिभावकों का प्रतिनिधित्व कर रहे भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा इन दोषी स्कूलों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। कुछ पदाधिकारियों ने तो यहां तक मांग की है कि ऐसे विद्यालयों की मान्यता तुरंत प्रभाव से रद्द कर देनी चाहिए जो बच्चों को परीक्षा से रोकने की धमकी देते हैं। प्रदर्शनकारियों में पूर्व छात्र संघ अध्यक्षों से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक की भारी उपस्थिति ने यह साफ कर दिया है कि खटीमा में अब निजी स्कूलों की इस प्रकार की तानाशाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष गणेश ठुकराती, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नगर मंडल महामंत्री मनोज वाधवा, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष किशोर जोशी, पूर्व नगर पालिका सभासद नीरज रस्तोगी, भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री भुवन जोशी, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सतीश भट्ट, दीपक सावंत, करण यादव, मेहताब राजा, बलवंत पोखरिया, संजय ठाकुर, जितेंद्र विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे।
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