बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम आने के बाद प्रदेश की सियासत में उस वक्त जबरदस्त भूचाल आ गया, जब केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने एक सार्वजनिक मंच से चुनाव जीतने और "जिताने" के गुप्त खेल को लेकर बड़ा खुलासा कर दिया। शनिवार को गया के टिकारी में आयोजित एक अभिनंदन समारोह में मांझी ने खुलेआम यह स्वीकार किया कि चुनावों में हार और जीत के पीछे केवल जनता का वोट ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक "मैनेजमेंट" की भी बड़ी भूमिका होती है। उनके इस कबूलनामे का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिसके बाद बिहार की चुनावी शुचिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

​मंच से अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में बोलते हुए मांझी ने साल 2020 के विधानसभा चुनाव का एक बेहद चौंकाने वाला संस्मरण साझा किया। उन्होंने दावा किया कि उस चुनाव में टिकारी सीट से उनकी पार्टी के उम्मीदवार अनिल कुमार लगभग 2,700 वोटों से पीछे चल रहे थे और उनकी हार लगभग तय मानी जा रही थी। मांझी ने कहा कि उस वक्त उन्होंने जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी से सीधे बात की थी और कुछ ऐसा "प्रयास" किया कि हारता हुआ प्रत्याशी अचानक जीत गया। मांझी यहीं नहीं रुके, उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए 2025 के चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए अफसोस जताया कि इस बार भी अनिल कुमार महज 1,600 वोटों से हार गए, लेकिन अगर उन्हें चुनाव के दौरान समय रहते इस स्थिति का पता चल जाता तो वह "कुछ" जुगाड़ करके उन्हें फिर से जिता देते।

​मांझी के इस बयान ने बिहार की राजनीति में बारूद का काम किया है। मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने इस वीडियो को हाथों-हाथ लेते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जो आरोप वे सालों से लगाते आ रहे थे कि बिहार में जनादेश की चोरी होती है और प्रशासन की मदद से चुनाव पलटे जाते हैं, उस पर आज एनडीए के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक ने खुद मुहर लगा दी है। विपक्षी खेमे ने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और उस समय के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है, ताकि भविष्य में चुनाव आयोग की साख पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।

​विवाद को गहराता देख जीतन राम मांझी और उनकी पार्टी अब बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। मांझी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी सफाई में कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और वह केवल पुनर्मतगणना यानी रीकाउंटिंग की संवैधानिक प्रक्रिया की चर्चा कर रहे थे। हालांकि, वीडियो में उनके हाव-भाव और "मैनेजमेंट" वाले शब्दों ने सत्ताधारी गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मांझी का यह बयान आने वाले दिनों में न केवल बिहार विधानसभा के भीतर बल्कि संसद तक में हंगामे का कारण बन सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा करता है।


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