झारखंड की राजधानी रांची में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को हिंसक हो उठा। अपने आंदोलन के 17वें दिन, हजारों की संख्या में अभ्यर्थी नए विधानसभा भवन का घेराव करने निकले, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई।

सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़े छात्र, पुलिस ने मोर्चा संभाला
प्रदर्शन सुबह करीब 10:30 बजे पुराने विधानसभा परिसर से शुरू हुआ। हाथ में तिरंगा और तख्तियां लिए अभ्यर्थी बैरिकेड्स तोड़ते हुए आगे बढ़ने लगे। पूरे रास्ते करीब चार किलोमीटर तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक कई सुरक्षा घेरों को पार कर लिया।
पानी की बौछार के बाद हुआ लाठीचार्ज
जगन्नाथपुर मंदिर के पास जब प्रदर्शनकारियों ने अंतिम बैरिकेड को तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, तब पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और फिर आंसू गैस छोड़ी। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें कई अभ्यर्थियों को गंभीर चोटें आई हैं। घायल अभ्यर्थियों ने पुलिस की कार्रवाई को 'बर्बर' करार दिया है।
एंबुलेंस और स्ट्रेचर से पहुंचे अनशनकारी छात्र नेता
परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में नौ दिनों से अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो खुद एंबुलेंस से प्रदर्शन स्थल पहुंचे और स्ट्रेचर पर लेटकर मार्च की अगुवाई की। पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर हाथ में थामे महतो ने कहा कि छात्रों पर पुलिसिया बल प्रयोग से जनआक्रोश और भड़क रहा है।
पुलिस प्रशासन का क्या कहना है?
रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि अधिकांश छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कुछ तत्वों ने बैरिकेड्स तोड़े और पुलिस बलों पर हमले का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को सीमित बल प्रयोग करना पड़ा।
1500 से अधिक जवान रहे तैनात
विधानसभा घेराव को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), इंडियन रिजर्व बटालियन (IRB) और जिला पुलिस बल के 1500 से अधिक जवानों को तैनात किया गया था। पूरे इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर ड्रोन से निगरानी की जा रही थी।
सरकार के 98% मांगें मानने के दावे पर छिड़ा विवाद
राज्य सरकार का दावा है कि वार्ता के दौरान अभ्यर्थियों की 98% मांगें मान ली गई हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार सिर्फ तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत हुई है, जबकि उनकी मांग 13 संदिग्ध परीक्षाओं को रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और पूरे भर्ती तंत्र में संरचनात्मक सुधार लाने की है।
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