उधमसिंह नगर जिले के जसपुर क्षेत्र में स्थित एक निजी स्कूल की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षा विभाग सख्त रुख अपना रहा है। स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने और विद्यार्थियों के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायतों के बाद विभाग ने आधिकारिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें एक सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
मनमाने शुल्क पर उठे सवाल
जिला पंचायत सदस्य चरनजीत सिंह ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को सौंपे शिकायत पत्र में स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। आरोप है कि स्कूल में एनसीईआरटी की प्रामाणिक किताबों के स्थान पर जानबूझकर महंगी निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसके साथ ही निर्धारित दुकानों से महंगी ड्रेस व अन्य सामग्री खरीदने का आर्थिक बोझ अभिभावकों पर डाला जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बोर्ड परीक्षाओं व अन्य मदों के नाम पर 5,000 से 6,000 रुपये तक की अतिरिक्त धनराशि अवैध रूप से वसूली जा रही है।
छात्रों के उत्पीड़न का दावा
मामले का एक बेहद चिंताजनक पहलू विद्यार्थियों के मानसिक उत्पीड़न से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, समय पर फीस न दे पाने वाले छात्रों को कक्षा, परीक्षा व अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से बाहर करने की धमकियां दी जाती थीं। शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि जांच में यह आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह सीधे तौर पर बाल अधिकारों और शैक्षणिक नियमों का खुला उल्लंघन माना जाएगा।
निराश्रित छात्रा को मिली राहत
इसी घटनाक्रम के बीच शिक्षा अधिकारी ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कक्षा 12वीं की एक छात्रा, जिसके पिता का निधन हो चुका है, पारिवारिक तंगी के कारण फीस देने में असमर्थ थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच अधिकारी हेमंत कुमार मिश्रा ने स्कूल प्रशासन को छात्रा की फीस में अधिक से अधिक छूट देने के स्पष्ट आदेश दिए हैं, ताकि उसकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
स्थलीय निरीक्षण से सामने आएगी सच्चाई
जांच अधिकारी ने बताया कि वे जल्द ही स्कूल का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और शिकायत के प्रत्येक बिंदु की बारीकी से पड़ताल करेंगे। स्कूल के वित्तीय दस्तावेजों, किताबों की सूची और दोनों पक्षों के बयानों को दर्ज कर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें शिक्षा विभाग की इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर ही स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आगामी प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।
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